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केंद्र सरकार ने बढ़ाकर नहीं दी छह फीसदी ग्रांट, पंजाब यूनिवर्सिटी को लगा 15 करोड़ का फटका

Tue, 22 Sep 2020 10:08 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, चंडीगढ़

सार

  • 250 करोड़ रुपये हर साल देती है केंद्र सरकार, इस बार देने थे 265 करोड़
  • अब तक वही बजट मिला जो पिछले साल छह माह के दौरान हुआ था जारी
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने पंजाब विश्वविद्यालय को इस बार छह फीसदी रकम बढ़ाकर नहीं दी। इससे पीयू को लगभग 15 करोड़ का झटका लगा है। अप्रैल से लेकर सितंबर तक यानी छह माह की रकम अब तक केंद्र की ओर से जारी की गई है। उसमें एक भी रुपये बढ़ाकर नहीं दिए गए। पिछले साल जो ग्रांट हर माह जारी हो रही थी वही ग्रांट महज वेतन के रूप में इस बार जारी हो रही है। जानकारों का कहना है कि केंद्र के पास रकम का अभाव है। ऐसे में इस बजट में कटौती की गई है। हालांकि अभी रास्ते खुले हैं। पीयू दबाव डालेगी तो अगले छह माह के दौरान यह रकम उनके खाते में आ सकती है।
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पंजाब सरकार ने दिए महज छह करोड़
पंजाब सरकार हर साल पीयू को 26 करोड़ रुपये देती है। इस रकम से पीयू चाहे निर्माण करवाए या फिर शिक्षकों को वेतन दे। इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। सरकार ने छह माह में अब तक महज छह करोड़ रुपये ही पीयू को दिए हैं। पंजाब सरकार पर 20 करोड़ रुपये बकाया है। सूत्रों का कहना है कि पंजाब सरकार बची रकम जनवरी के बाद दे सकती है, क्योंकि सरकार का खजाना भी लगभग खाली है।

सितंबर का वेतन खर्च खजाने में
केंद्र सरकार ने शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन के लिए अगस्त में दो महीने की ग्रांट पीयू को भेजी थी। यह रकम लगभग 50 करोड़ रुपये है। यदि वेतन की ग्रांट कम पड़ेगी तो पीयू अपने किसी दूसरे मद से रकम लेकर वेतन देगी। हालांकि सितंबर के वेतन का पैसा पीयू के खजाने में है। इसके अलावा पेंशन आदि की रकम भी पीयू को देनी होती है। इसके लिए भी कम से कम आठ करोड़ रुपये चाहिए। इस रकम की पूर्ति फीस आदि से किए जाने की तैयारी चल रही है।
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इस तरह मिलती है करोड़ों की ग्रांट

पीयू का संचालन अधिकांशत: केंद्र सरकार के बजट पर निर्भर करता है, क्योंकि यहां 700 शिक्षक व 1500 से अधिक कर्मचारियों का वेतन सीधे केंद्र सरकार से मिलता है। केंद्र सरकार हर साल लगभग 250 करोड़ रुपये पीयू को देती है। इसके अलावा हर साल छह फीसदी रकम बजट में बढ़ाती भी है।

इस साल छह फीसदी रकम बढ़ा दी जाती तो पीयू के खाते में लगभग 265 करोड़ रुपये आने थे। छह फीसदी रकम बढ़ोत्तरी का मतलब है कि पीयू के खाते में 15 करोड़ रुपये अतिरिक्त आने थे। टोटल 12 माह की रकम को केंद्र सरकार चार हिस्सों में बांटकर देती है। इस बार कोरोना के कारण टुकड़ों में रकम मिली। इस वित्तीय वर्ष को छह माह बीत गए।

अब तक बढ़ाई गई रकम का हिस्सा पीयू के खाते में नहीं पहुंचा। केवल वेतन ही शिक्षकों को मिला है। सूत्रों का कहना है कि पीयू को जो 15 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलते हैं, उस रकम से पीयू अपने जरूरी कार्य करती है। इसके अलावा शिक्षकों की पेंशन आदि पर खर्च होता है।
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