पंजाब विश्वविद्यालय व इससे संबद्ध 192 कॉलेजों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू करवाने में पीयू प्रशासन फेल हो गया है। यही कारण है कि एक साल पहले बने सीबीसीएस प्रस्ताव को धरातल पर नहीं उतारा जा सका है। हैरत तो ये है कि नैक की टीम ने सीबीसीएस पर पूरा काम न होने पर आपत्ति दायर की थी, बावजूद इसके पीयू इसे लेकर गंभीर नहीं है।
क्या है सीबीसीएस
च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के तहत साइंस के विद्यार्थी आर्ट व आर्ट के विद्यार्थी साइंस के विषय पढ़ सकते हैं। साथ ही उन विषयों के जरिये अपना करिअर भी बना सकते हैं। वर्ष 2015 में नैक की टीम ने सुझाव दिया था कि इस सिस्टम पर काम होना चाहिए। पीयू ने साइंस के विद्यार्थियों के लिए यह सिस्टम लागू कर दिया। वह दूसरे कोर्स या विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं। इन विद्यार्थियों की संख्या 90 हजार से अधिक है लेकिन आर्ट यानी एमए के विद्यार्थी इस सिस्टम के लाभ से वंचित हैं। इनकी संख्या 50 हजार से अधिक है।
एक साल पहले तैयार हो गया मसौदा
पीयू की टीम ने बड़ी मेहनत से एमए के विद्यार्थियों के लिए सीबीसीएस का प्रस्ताव तैयार कर दिया। एक साल पहले यह प्रस्ताव सीनेट में गया तो कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया तो कुछ ने शिक्षकों की कमी के चलते इसे लागू करने के लिए और समय मांग लिया। एक साल से अधिक समय हो गया, लेकिन अब तक लागू नहीं हो पाया। हजारों विद्यार्थी इसका इंतजार कर रहे हैं। इस सिस्टम का लाभ लिए बिना ही हर साल दस से 12 हजार विद्यार्थी पास आउट भी हो रहे हैं।
इन कोर्स को किया गया था शामिल
- कोर कोर्स
- इलेक्टिव कोर्स
- डिसिप्लेनरी स्पेशिफिक इलेक्टिव कोर्स
- जेनरिक इलेक्टिव कोर्स
- स्किल इनहेंसमेंट कोर्स
सीबीसीएस सिस्टम एमए में अभी लागू नहीं हो पाया है। इस पर काम चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। नैक की टीम ने भी इसके लिए सुझाव दिए थे।
- प्रो. एम राजीव लोचन, निदेशक आईक्यूएसी
सीबीसीएस सिस्टम के लिए पूरा प्रस्ताव तैयार कर दिया गया है, उसके बाद सीनेट में यह प्रस्ताव रखा गया था। उस दौरान कॉलेजों ने शिक्षकों की कमी की बात कही थी।
- प्रो. रोनकी राम, चेयरमैन सीबीसीएस