चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की ओर से साल 2017 में किए गए वायदे पूरे नहीं हो पाए। डेपुटेशन पॉलिसी अभी तक फाइनल नहीं हो पाई है। कांट्रैक्ट पर काम कर रहे शिक्षकों को समय पर सैलरी नहीं मिली। इसके अलावा 1200 शिक्षकों की भर्ती नहीं हो पाई। शिक्षा विभाग में कांट्रैक्ट पर काम करने वाले शिक्षकों के लिए यह साल अच्छा नहीं रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत आने वाले 1077 शिक्षक चार महीने तक सैलरी का इंतजार करते रहे। शहर के स्कूलों में काम करने वाले 88 काउंसलर्स को पांच महीने से सैलरी नहीं मिली।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से शिक्षकों की सैलरी की ग्रांट सही समय पर नहीं दी गई। 1200 शिक्षकों की भर्ती की बात जरूर हुई, लेकिन वह भी शिक्षा विभाग नहीं कर पाया। वहीं, स्टूडेंट्स को वर्दी के पैसे सीधे अकाउंट में दिए गए। स्कूलों में फीस की ई-पेमेंट के लिए स्वाइप मशीनें दी गईं, लेकिन सर्विस चार्ज कटने से अभिभावकों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। वहीं, दसवीं के स्टूडेंट्स के लिए वोकेशनल कोर्स शुरू कर दिया गया है।
कंप्यूटर टीचरों ने किया धरना-प्रदर्शन
शहर के सरकारी स्कूलों में दो सौ कंप्यूटर टीचर और डाटा ऑपरेटर काम कर रहे थे। उन्होंने अप्रैल वर्ष 2017 में वेतन बढ़ानें, कांट्रैक्ट रिन्यूअल और पक्का करने की मांग की तो शिक्षा विभाग ने सेवा मुक्त कर दिया। धरना-प्रदर्शन केबाद शिक्षा विभाग ने इनका कांट्रैक्ट रिन्यू किया। इसके बाद ये काम पर लौटे।
काउंसलर को पांच महीने से नहीं मिला वेतन
नेट 2017
कंप्यूटर टीचर और डाटा ऑपरेटर के बाद शहर के स्कूलों में तैनात 88 काउंसलर्स को पांच महीने से सैलरी नहीं मिली है। गुरुग्राम में हुए प्रद्युम्न हत्याकांड केबाद सरकारी स्कूलों में काउंसलर की संख्या बढ़ाने की बात कही गई थी, लेकिन स्कूलों में काम कर रहे 88 काउंसलर को मार्च से नंवबर 2017 तक वेतन नहीं मिला। दिसंबर के तीसरे सप्ताह में जाकर उन्हें चार महीने का वेतन रिलीज किया गया। अभी भी पांच महीने का बकाया है।
शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई
शहर के 115 सरकारी स्कूलों में करीब 5300 शिक्षक हैं। शिक्षकों के रिटायर होने के बाद शिक्षा विभाग के करीब 1200 शिक्षकों के पद खाली हो गए हैं। अभी तक इस पर कोई भर्ती नहीं हो पाई है। एमएचआरडी की ओर से शिक्षकों की यह अप्रूवल नहीं मिली है। इस कारण शिक्षा विभाग के स्कूलों में टीचरों की कमी लगातार बनी हुई है।
शिक्षा विभाग से ये रिटायर हुए
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की जिला शिक्षा अधिकारी विनया आर सूद और चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर चंचल सिंह अप्रैल में रिटायर हो गए। वहीं, तीन महीने बाद शिक्षा सचिव बंसीलाल शर्मा की नियुक्ति की गई।
जिला शिक्षा अधिकारी का पद दिया
एडमिशन
जिला शिक्षा अधिकारी का चार्ज नवंबर माह में अनुजीत कौर को दिया गया। नवंबर में ही जिला शिक्षा अधिकारी के तौर पर काम कर रही राजिंदर कौर को एडल्ट एजुकेशन का चार्ज सौंपा गया। एडल्ट एजुकेशन का कार्यभार देखने वाली विनया आर सूद को सेवानिवृत्त कर दिया गया। विनया आर सूद सेवानिवृत्त होने के बाद चंडीगढ़ कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट (सीसीपीसीआर) में सदस्य बनाई गई हैं।
इसी प्रकार से शिक्षा विभाग में जमे हुए चंचल सिंह को 29 साल के बाद सेवामुक्ति मिल गई। उन्हें भी आरटीई एक्सपर्ट्स का चार्ज सीसीपीसीआर में दिया गया है। उनके स्थान पर शिक्षा विभाग की सरोज मित्तल को डिप्टी डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन बनाया गया। वहीं, सुमन शर्मा को डिप्टी डायरेक्टर वोकेशनल एजुकेशन, मोनिका मैनी को डिप्टी जिला शिक्षा अधिकारी, सुखनीर कौर की सेवानिवृत्ति पर रेणु पुरी को जिला शिक्षा अधिकारी-प्रथम बनाया गया।
इसी प्रकार से अल्का मेहता को प्रमोट कर असस्टिेंट डायरेक्टर एडल्ड एजुकेशन-प्रथम बनाया गया। इसके अलावा सबसे अहम नियुक्ति शिक्षा सचिव बंसी लाल शर्मा की रही। बंसी लाल से पहले वित्त सचिव का कार्यभार देख रहे आईएएस सर्वजीत सिंह ही शिक्षा सचिव का कार्यभार देख रहे थे।
डेपुटेशन की सात साल स्टे पर नहीं हो पाया फैसला
डेपुटेशन पॉलिसी पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। पंजाब-हरियाणा से आए डेपुटेशन केटीचर्स की स्टे सात साल करने का प्रपोजल बनाया गया था, लेकिन अभी तक यह नहीं बन पाया है। वहीं, अभी तक ओवर स्टे डेपुटेशन के शिक्षक पंजाब-हरियाणा वापस नहीं भेजे गए। पूरे साल डेपुटेशन मामले को लेकर जनवरी से दिसंबर तक बीस से ज्यादा बैठक प्रशासन और शिक्षा विभाग के बीच हुई। इसके बाद भी कोई फैसला इस मुद्दे पर नहीं हो पाया है।
एडमिशन को लेकर बना है संशय
school admission
- ईडब्ल्यूएस कोटे की सीटों के दाखिले को लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। प्राइवेट स्कूलों की इस कोटे की सीटों की फीस शिक्षा विभाग ने तीन साल से वापस नहीं की है। इस कारण प्राइवेट स्कूल दाखिला देने से पहले शिक्षा विभाग से पढ़ाए गए बच्चों की फीस मांग रहे हैं, लेकिन शिक्षा विभाग इस पर अभी कोई रूख साफ नहीं किया है। इस कारण बच्चों के दाखिले को लेकर संशय बना हुआ है।
- चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में नौवीं और दसवीं केलिए शहर के 14 स्कूलों में वोकेशनल कोर्स वर्ष 2017 में शुरू किया गया। पहले यह ग्यारहवीं और बारहवीं के लिए ही चलता था।
- बच्चों की सुरक्षा के लिए चंडीगढ़ कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट की तरफ से स्कूलों में चेकिंग की गई। इस दौरान शहर के पंद्रह स्कूलों को नोटिस दिया है कि वह अपनी व्यवस्था को दुरुस्त करें।
- फीस बढ़ोतरी का मुद्दा खूब छाया। उसके बाद कई अभिभावक स्कूलों की मनमानी को लेकर अदालत तक गए। प्राइवेट स्कूल हर साल अपनी मर्जी से फीसों को बढ़ाते हैं। इस साल अभिभावकों ने फीस बढ़ोतरी को लेकर जमकर बवाल किया। फीस बढ़ोतरी का मामला जिला अदालत और हाईकोर्ट में चल रहा है। इसका अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। इस कारण अभिभावकों को अधिक फीस भरनी पड़ रही है।
एनसीईआरटी की बुक्स प्राइवेट स्कूलों में नहीं हुई लागू
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शहर के प्राइवेट स्कूलों में एनसीईआरटी की बुक्स लागू नहीं हो पाई है। हाईकोर्ट ने यह निर्देश दिया था कि सभी स्कूल यह बुक्स पढ़ाएंगे, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इसको नहीं माना। इसके बाद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्राइवेट स्कूल निजी पब्लिशर्स की बुक्स पढ़ा रहे हैं। शिक्षा विभाग और सीबीएसई के आदेशों को सीधे तौर पर नकार दिया है। इसके बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
दाखिले के लिए मांगा क्षतिपूर्ति बांड
नए सत्र के लिए क्षतिपूर्ति बांड प्राइवेट स्कूल भरवा रहे थे। इस पर सीसीपीसीआर से शिकायत की गई। इसके बाद यह बांड स्कूलों के सीसीपीसीआर और शिक्षा विभाग ने अवैध घोषित कर दिए हैं।
कॉलेजों में 2017 से सेंट्रलाइज एडमिशन
शहर के सरकारी और प्राइवेट कालेजों में पहली बार सेंट्रलाइज एडमिशन शुरू हुआ। बीएससी, बीकाम का सेंट्रलाइज एडमिशन होगा। वहीं, बीए के एडमिशन में यह शर्त नहीं लागू हुई है। 2017 में कॉलेजों में पहली बार एडमिशन ऑनलाइन हुआ। पहले मात्र बीकॉम और एमकॉम ही ऑनलाइन होता था, लेकिन इस बार बीए को छोड़कर सभी संकाय के दाखिले ऑनलाइन किए। कालेजों में फीस भी ऑनलाइन जमा हुई है।
अभी तक नही हुआ वाई फाई जोन
शहर के आठ गवर्नमेंट कालेज को वाई फाई जोन बनाया जाना था, लेकिन अभी तक नहीं बनाया जा सका। इस कारण स्टूडेंट्स को परेशानी होती है। यह सभी कालेजों में बनता तो स्टूडेंट्स और प्रोफेसर को राहत मिलती, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हो पाया है।
स्टाफ की कमी के कारण नहीं शुरू हुए कोर्स
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पीजीजीसी-46 में बीएससी नॉन मेडिकल संकाय स्टाफ की कमी के कारण शुरू नहीं हो पाया है। बीएससी नॉन मेडिकल की मंजूरी मिल गई है, लेकिन अभी तक यह प्रोजेक्ट अधूरा रह गया है। इससे स्टूडेंट्स को परेशानी हो रही।
जीसीजी-11 को पहला स्थान
स्वच्छ भारत अभियान के तहत कई मुहिम शुरू की गई। स्वच्छ कॉलेज कैंपस सर्वे हुआ। पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स सेक्टर-11 को इसमें पहला और देशभर में पांचवां स्थान हासिल किया।
पीजीजीसी-11 और 46 के प्रिंसिपल का तबादला और उसके बाद विवाद
पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज सेक्टर-11 के तत्कालीन प्रिंसिपल प्रो. जेके सहगल का पीजीजीसी-46 में तबादला हो गया था, जबकि पीजीजीसी-46 के तत्कालीन प्रिंसिपल प्रो. बीपी यादव का पीजीजीसी-11 में तबादला हो गया था। इस मामले ने जबरदस्त तूल पकड़ा, क्योंकि किसी भी प्रिंसिपल का तबादला ऐसे संभव नहीं होता है। बिना कारण और कार्यकाल पूरा किए किसी भी प्रिंसिपल का तबादला संभव नहीं था।