हरियाणा में ग्रामीण विकास निधि की राशि सरकार के समेकित फंड में जमा कराए बिना ही ग्रामीण विकास निधि प्रशासन बोर्ड ने खर्च कर दी। 2011 से 2017 तक यह मनमानी चलती रही। बोर्ड ने बाजार में प्रोसेसिंग के लिए लाए गए कृषि उत्पादों की बिक्री के लाभों पर दो प्रतिशत सेस वसूल कर सात साल में 3068.82 करोड़ रुपये अर्जित किए। इस राशि को खर्च करने से पहले सरकार के समेकित फंड में जमा कराना जरूरी था। चूंकि, सरकार ने यह फंड सार्वजनिक व्यय के लिए बनाया हुआ है।
बोर्ड ने बिना राशि जमा कराए ही अर्जित राशि में से 2468.28 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। राशि को ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के विकास, डिस्पेंसरियों की स्थापना, जलापूर्ति एवं स्वच्छता प्रबंधन और गोदामों के निर्माण पर खर्च किया गया है। वार्षिक बजट प्लान में भी इस राशि को सरकार ने शामिल नहीं किया, जिससे इस निधि पर विधानसभा का कोई नियंत्रण नहीं रहा। कैग ने ग्रामीण विकास निधिक प्रशासन बोर्ड की इस मनमानी पर अपनी 2017-18 की वार्षिक रिपोर्ट में उंगली उठाई है।
कैग ने सरकार को सुझाव दिया है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए पहले सभी राजस्व प्राप्तियां समेकित फंड में जमा हों और उन्हें विधानसभा की स्वीकृति के बाद खर्च किया जाए। कैग ने विधानसभा के सदन पटल पर रखी अपनी रिपोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से हर वर्ष मिलने वाले सहायता अनुदान में लगातार हो रही कमी पर भी सवाल उठाए हैं। हरियाणा को 2015-16 में 6378.76 करोड़, 2016-17 में 5677.58 करोड़ और 2017-18 में 5185. 12 करोड़ रुपये अनुदान मिला है। बीते वर्ष की तुलना हरियाणा को 492.46 करोड़ रुपये कम अनुदान मिला। जबकि इससे पिछले वर्ष यानि 2016-17 में 11 प्रतिशत कम अनुदान 2015-16 की तुलना केंद्र से प्रदेश को प्राप्त हुआ।