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अलविदा 2017: चंडीगढ़ नगर निगम को कुछ खट्टे कुछ मीठे अनुभव हुए, देखिए

Sun, 24 Dec 2017 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग
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साल 2017 में चंडीगढ़ नगर निगम को कई खट्टे मीठे अनुभव हुए। स्वच्छता सर्वेक्षण में शहर की रैकिंग गिरने से भी निगम की किरकिरी हुई। मेयर बनते ही आशा जसवाल पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। जबकि नगर निगम की वित्तीय हालत खस्ता हो गई, हालांकि अपनी आय बढ़ाने के लिए शहरवासियों पर पार्किंग के रेट बढ़ाकर बोझ थोपा गया।
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पूरा साल ही डंपिंग ग्राउंड के गारबेज और जेपी कंपनी के प्लांट द्वारा कचरा प्रोसेस करने की कार्रवाई पर सवाल उठता रहा। नगर निगम कजौली वाटर वर्क्स के दो नए फेज से शहर में पानी लाने की अपनी डेडलाइन भी पूरा नहीं कर पाया।

साल के अंत में एक के बाद एक चार आडियो वायरल हुए जिसने निगम की राजनीति में भूचाल ला दिया और पार्षदों पर भी सवाल खड़े हुए। आवारा कुत्तों की समस्या को कोई हल नहीं हो सका। इस साल वेंडर एक्ट के नाम पर शहर में खूब अतिक्रमण बढ़ा।
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कमिश्नर बी पुरूषार्था का दिल्ली में तबादला हो गया। पुरूषार्था के जाने के बाद  प्रशासन ने आईएएस जितेंद्र यादव को नगर निगम कमिश्नर का अतिरिक्त चार्ज दिया। इस सबके बावजूद मेयर आशा जसवाल काम करवाने में सक्रिय भूमिका निभाती रहीं।

भाजपा मेयर पर हुआ मामला दर्ज

मेयर आशा जसवाल - फोटो : अमर उजाला
जनवरी माह में आशा जसवाल मेयर बनी लेकिन अधिकारियों के आदेश पर पुलिस ने मेयर पर ही मामला दर्ज कर किया गया था। यह मामला मेयर पर स्नेहालय में एक बच्चे की पहचान उजागर करने के आरोप में किया गया। इस बच्चे के साथ कुकर्म हुआ था।

अपनी ही उम्मीदवार नेगी को हराया
नगर निगम में भाजपा के 20 पार्षद होने के बावजूद हीरा नेगी वित्त एवं अनुबंध कमेटी के सदस्य का चुनाव नहीं जीत पाईं। भाजपा के अपने पार्षदों ने ही क्रास वोटिंग करते हुए हीरा नेगी को हरा दिया जिससे पार्षदों की गुटबाजी उभर कर सामने आई। नेगी द्वारा पार्टी प्रभारी प्रभात झा को इसकी शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

स्वच्छता रैंकिंग गिरने से हुई किरकिरी
स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग दूसरे नंबर से गिरकर 11 वे नंबर पर पहुंच गई। नगर निगम ने रैंकिंग गिरने के लिए शहरवासियों के फीडबैक को कारण बताया। जबकि अक्तूबर माह के बाद से नगर निगम ने शहरवासियों को ज्यादा से ज्यादा जोड़ने के लिए स्वच्छता एप डाउनलोड करवाने के लिए अभियान चलाया। रैंकिंग गिरने पर सांसद किरण खेर ने भी दक्षिणी सेक्टरों में सफाई करने वाली लायंस कंपनी पर सवाल उठाया। इस कंपनी को नगर निगम हर माह सवा 4 करोड़ रुपये का भुगतान कर रहा है।

ऑडियो हुए वायरल

चंडीगढ़ नगर निगम
एक के बाद चार ऑडियो वायरल हुए जिससे नगर निगम के पार्षदों पर सवाल खड़े हुए हैं। पहला आॅडियो अतिक्रमण हटाओ दस्ते के दो सब इंस्पेक्टरों का वायरल हुआ जिसमें एक पार्षद को 15 हजार रुपये देने की बात सामने आई। इसके बाद सेनिटेशन कमेटी के चेयरमैन और लायंस कंपनी के प्रतिनिधि के बीच कथित बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ, जिसको लेकर सदन में हंगामा हुआ।

इसके बाद निर्दलीय पार्षद दलीप शर्मा और एक महिला की बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ जबकि दो अन्य लोगों का ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें इंदिरा कॉलोनी के पार्षद पर आरोप लगे। इन सभी ऑडियो से परेशान होकर मेयर ने एसएसपी को पत्र लिखकर मीडियाकर्मियों को भी जांच में शामिल करने की बात कही है।

नहीं आया पानी, डेडलाइन हुई खत्म
नगर निगम ने कजौली वाटर वर्क्स के दो नए 5 वें और छठे फेज से पानी लाने का दावा किया था लेकिन प्रोजेक्ट पूरा करने की डेडलाइन नगर निगम पूरी नहीं कर पाया। जबकि इस प्रोजेक्ट के कारण नगर निगम की वितीय हालत जरूर खस्ता हो गई क्योंकि एफडी तुड़वा कर नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट पर 225 करोड़ रुपये का खर्चा कर रहा है। इस प्रोजेक्ट से ही नगर निगम ने स्मार्ट सिटी के तहत 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू करने का सपना देखा  हुआ है।

कागजी विकास
स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ लोगों को डराया गया। कागजों में ज्यादा काम हुआ जबकि ग्राउंड में काम नहीं हुआ। उम्मीद है कि नए साल में शहरवासियों की समस्याएं दूर होंगी। प्रशासन और नगर निगम को चाहिए लोगों पर बिना अतिरिक्त बोझ डाले पहले से बेहतर सुविधाएं दी जाएं।
- बलजिंदर बिट्टू, चेयरमैन, फासवेक

टैक्स ही थोपे

चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
भाजपा मेयर का ध्यान सिर्फ शहर पर नए नए टैक्स लगाने पर ही रहा है। विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। सदन में सिर्फ मेयर और पूर्व मेयर अरुण सूद के वार्ड के ही प्रस्ताव पास होने के लिए आए। गारबेज प्लांट की दिक्कत दूर नहीं हुई जबकि नगर निगम पर टिपिंग फीस का बोझ अलग से डल गया। स्मार्ट के नाम पर पेड पार्किंग के रेट में इजाफा कर दिया गया जबकि स्मार्ट के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। एफडी 150 करोड़ रह गई है कोई अतिरिक्त ग्रांट नहीं आई। उम्मीद है कि नए साल में ऐसा मेयर आएगा जो कि सभी पार्षदों को साथ लेकर चलेगा।
- दवेंद्र सिंह बबला, कांग्रेस पार्षद

मेयर को मलाल
काफी काम हुए हैं, लेकिन वह स्वच्छ भारत मिशन को एक जन आंदोलन बनना चाहती थीं, जो नहीं हो पाया। हालांकि स्वच्छ भारत मिशन का अभियान काफी तेजी से चला है। लेकिन इस साल जो शहर में डेड पेड़ लगे थे, उनको हटवाने की एक साथ मंजूरी प्रशासन से ली गई। इसके साथ ही प्रशासन के साथ नगर निगम के कोआर्डिनेशन में भी सुधार हुआ। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के समय सांसद और प्रशासक ने सहयोग दिया। तो विपक्षी पार्षदों का सहयोग भी मिला। 31 मार्च तक कजौली वाटर वर्क्स  के दो नए फेज का काम पूरा हो जाएगा, जिससे पानी की किल्लत दूर हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट के लिए पंजाब सरकार से जंडपुर में जमीन का विवाद पैदा हो गया था जिस पर प्रशासक एवं पंजाब के गवर्नर ने काफी मदद की।
- आशा जसवाल, नगर निगम मेयर

शहर को मिले दो नए कम्युनिटी सेंटर
इस साल शहर में दो दर्जन से ज्यादा इलाकों में ओपन एयर जिम का निर्माण किया गया है। इसके अलावा शहर को दो नए कम्युनिटी सेंटर मिले हैं, जिसमें क्लब की सुविधा के लिए रेस्टोरेंट भी बनाया गया है। सेक्टर-38 वेस्ट और सेक्टर-37 में ये नए कम्युनिटी सेंटर का निर्माण किया गया है।
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कुत्तों का आतंक जस का तस

चंडीगढ़ नगर निगम
शहर में कुत्तों का आतंक बरकरार रहा। सेक्टर-15 और मौलीजागरां में दो अलग अलग जगह जिन कुत्तों ने काटा, उनकी रैबीज के कारण बाद में मौत हो गई। सदन में खूब हंगामा हुआ। इसके अलावा मेयर के अपने वार्ड (सेक्टर-18) में गंदे पानी की सप्लाई होने से डायरिया भी फैला। इसके बाद नगर निगम ने कुत्तों के काटने का इलाज पूरी तरह से मुफ्त करने का निर्णय लिया।

पेड पार्किंग के रेट दोगुने किए, रेजिडेंट्स की कटी जेब
पेड पार्किंग के रेट दोगुने कर दिए गए। 4 घंटे बीतने के बाद हर दो घंटे बाद पार्किग के रेट बढ़ेंगे। यह रेट नगर निगम ने शहर की 25 पेड पार्किंग पर लागू किए हैं। नगर निगम ने पार्किंगों को स्मार्ट करने का दावा किया है। जबकि इन पार्किंगों को चलाने वाली आर्य इंफ्रा कंपनी से नगर निगम ने 14 करोड़ 76 लाख रुपये की कमाई की है।

डस्टबिन बांटे, लेकिन सूखा गीला कचरा अलग नहीं हुआ
नगर निगम ने दो लाख से ज्यादा घरों में फ्री में सूखा और गीला कचरा इकट्ठा करने के लिए अलग-अलग डस्टबीन बांटे यहां तक कि नगर निगम ने गारबेज कलेक्शन के रेट भी बढ़ा दिए लेकिन न तो अलग अलग कचरा इकट्ठा करने का सिस्टम शुरू हुआ और न ही कोई व्यवस्था में सुधार हुआ जबकि नगर निगम ने सवा दो करोड़ रुपये का खर्चा करके डस्टबिन खरीदे थे।

डंपिंग ग्राउंड से नहीं मिली मुक्ति टिपिंग फीस अलग से लगी
शहरवासियों को डंपिंग ग्राउंड से मुक्ति नहीं मिली। नगर निगम ने जेपी कंपनी से प्लांट वापस लेने का फैसला भी लिया लेकिन एनजीटी ने ऐसा नहीं करने दिया। पहले निशुल्क प्रोसेस हो रहे कचरे के लिए अब एनजीटी के आदेश पर नगर निगम को 500 रुपये टन के हिसाब से प्लांट को टिपिंग फीस भी देनी पड़ रही है। इस कारण से नगर निगम पर हर माह 50 लाख रुपये का बोझ भी बढ़ गया है।
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