साल 2015 से लेकर अब तक अपनी रैंकिंग में सबसे अधिक सुधार लाने वाला लक्ष्यद्वीप रहा है। 2015 में इसकी रैंक 33 थी जो 2019 में 15 हो गई है। इसके बाद दमन और दीव व उत्तराखंड की रैंकिंग में सबसे अधिक सुधार आया है। इस रैंकिंग को श्रम कानून, जमीन की उपलब्धता, निर्माण की अनुमति, पर्यावरण पंजीकरण, सूचना तक पहुंच और सिंगल विंडो सिस्टम जैसे मानकों पर मापा जाता है। यह ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का चौथा संस्करण है।
फैसले नहीं ले सके अधिकारी, चुपचाप बैठे रहे
रैंकिंग में सुधार नहीं आने के शहर के व्यापारियों ने कई कारण बताए। कहा कि प्रशासन ने वर्ष 2015 के चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल पॉलिसी को अबतक लागू नहीं किया है। इसके अलावा लीज होल्ड प्रॉपर्टी का फ्री होल्ड में नहीं बदल पाने से बिजनेस आगे नहीं बढ़ पा रहा है। न ही फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन के अधिकारियों ने व्यापार को बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया नहीं। वह चुपचाप बैठे रहे, जिसका खामियाजा अब चंडीगढ़ को भुगतना पड़ रहा है। व्यापार के मामले में पंजाब और हरियाणा चंडीगढ़ से आगे निकल चुके हैं। लोग पंजाब और हरियाणा की तरफ पलायन कर रहे हैं।
यह होता है ईज ऑफ डूइंग बिजनेस
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का अर्थ है कि प्रदेश में कारोबार करने में कारोबारियों को कितनी आसानी होती है। कारोबार शुरू करने और उसे चलाने के लिए माहौल कितना अनुकूल है। अगर किसी कंपनी को कारोबार शुरू करने में कठिन कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं या फिर रिश्वत व कागजी कार्रवाई में व्यापारियों को फंसा दिया जाता है तो उसकी रैंकिंग नीचे गिर जाती है।
पंजाब-हरियाणा का बिजनेस बढ़ा, चंडीगढ़ का नहीं
चंडीगढ़ की इस रैंकिंग के पीछे कई कारण हैं, जिनमें चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2015 को लागू न करना, लीज होल्ड प्रॉपर्टी का ट्रांसफर न होगा, एफएआर की समस्या अहम है। व्यापारियों को नियम व कानूनों में फंसा कर रख दिया, जिससे कि बिजनेस आगे नहीं बढ़ पाता है। यही कारण है कि पंजाब और हरियाणा का बिजनेस आगे बढ़ रहा है लेकिन चंडीगढ़ का नहीं। - नवीन मंगलानी, प्रेसिडेंट, चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज
चंडीगढ़ में होना चाहिए एमएचए का एक ऑफिस
चंडीगढ़ की इस रैंकिंग का सबसे बड़ा कारण है कि इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए कुछ फैसले लिए गए थे लेकिन पिछले करीब 20 साल से वह अटके पड़े हैं। उन पर कोई ध्यान नहीं देता। इसके अलावा प्रशासन के अधिकारियों को भी फाइल क्लीयर कराने के लिए दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्रालय जाना पड़ता है। एमएचए को चंडीगढ़ में भी एक ऑफिस शुरु करना चाहिए ताकि शहर के काम तेजी से हो सकें। - एमपीएस चावला, प्रेसिडेंट, चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
यह भी देखें: हमारे चैनल को सब्सक्राइब भी करें-