- रोडवेज विभाग ने जिला प्रशासन के अधीनस्थ अपनी कई बसें पैरामेडिकल स्टाफ व पुलिस कर्मियों के आवागमन के लिए दी हुई है। उसका डीजल व अन्य खर्च रोडवेज उठाता है।
- सरकारी बसों में मोबाइल क्लीनिक भी चलाई जा रही है। जबकि माइग्रेंट लेबर को उनके राज्यों तक छोड़ कर आना, राजस्थान के कोटा में अपने प्रदेश के छात्रों को लेकर आना व अमृतसर एयरपोर्ट पर पहुंचे हरियाणा के विदेशी नागरिकों को लेकर आने में भी सरकारी बसों का इस्तेमाल हुआ। इस दौरान भी डीजल समेत अन्य खर्च रोडवेज विभाग ने उठाया।
- बसों के ड्राइवर व कंडक्टर के लिए रोजाना सैनिटाइजर की बोतल उपलब्ध कराना। एक रूट पर फेरी खत्म होने के बाद पूरी बस को सैनिटाइज करना, बस अड्डों पर यात्रियों की जांच के लिए थर्मल स्कैनर उपलब्ध कराना इत्यादि खर्च भी विभाग ही करता है। लेकिन आमदनी ज्यादा नहीं होती।
बसें पूरी नहीं चल पा रही है। डीजल का रेट भी पिछले दिनों लगातार बढ़ा है। लेकिन अभी स्थिर है। रोडवेज विभाग का नुकसान भी बढ़ा रहा है। फिर से किराया बढ़ाया जा सकता है या नहीं, इस संदर्भ में प्रस्ताव पर सरकार स्तर पर मंथन होगा। हर पहलू व परिस्थितियों की समीक्षा की जाएगी। उसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
- मूलचंद शर्मा, परिवहन मंत्री, हरियाणा