नए वित्त वर्ष में हरियाणावासियों को नए करों का सामना करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर खजाना खाली होने और प्रदेश पर भारी कर्ज का हवाला दे चुके हैं।
सोमवार से शुरू हो रहे हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र से पहले सरकार ने खर्चों में कटौती करने और आय केनए साधन सृजित करने के संकेत दिए हैं। वहीं, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के पास घटते राजस्व की भरपाई के लिए टैक्स के अलावा कोई और साधन भी नहीं है।
प्रदेश में पूर्व हुड्डा सरकार की ओर से बीते दो वार्षिक बजटों में कोई कर नहीं लगाया गया। उस दौरान जो राजस्व घाटा बढ़ा, उसे पूरा करने केलिए सरकार कर्ज लेती रही। स्थिति यह रही कि जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) में कर राजस्व का प्रतिशत वर्ष 2004-05 के 7.8 फीसदी से वर्ष 2013-14 में घटकर 6.6 फीसदी रह गया।
इस दौरान बढ़ते खर्चों ने प्रदेश के वित्तीय ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। प्रदेश में वर्ष 2014-15 का कुल बजट 73301.08 करोड़ का था, जिसमें राजस्व घाटा 5013 करोड़ दर्शाया गया। तब हुड्डा सरकार ने राजस्व व्यय 52702.71 करोड़ और राजस्व की उगाही 47690.14 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया था। फिर भी हुड्डा सरकार अपनी प्राप्तियों को गैर-योजना और तदर्थ व्यय के रूप में खर्च करती रही।
अब प्रदेश में निजाम बदला और वर्ष 2015-16 के बजट में खट्टर सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बिजली और शिक्षा पर दी जा रही सब्सिडी राशि भी है। वर्ष 2013-14 के बजट में बिजली के लिए 5338.5 करोड़ रुपये की राशि हुड्डा सरकार को रखनी पड़ी थी, जबकि शिक्षा क्षेत्र में प्रति विद्यार्थी लगभग 1300 रुपये खर्च किए गए।
सरकार को चाहिए 20 हजार करोड़
सूत्रों केअनुसार, भाजपा सरकार यदि जनता पर बोझ बढ़ाने की नाराजगी के बचना भी चाहे तब भी उसे जीएसडीपी के मौजूदा प्रतिशत को बनाए रखने केलिए कम से कम 20 हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। इतनी बड़ी राशि केवल नए टैक्स या पुराने टैक्सों को बढ़ाकर नहीं उगाही जा सकती, इसलिए भाजपा सरकार को भी मौजूदा खर्चों में कटौती करनी होगी।
हालांकि, इस साल केंद्र सरकार की ओर से इस साल वित्त आयोग की बैठक में लिए गए उस फैसले से प्रदेश सरकार को कुछ राहत मिलेगी, जिसमें केंद्र से राज्यों को मिलने वाली रकम में 10 फीसदी का इजाफा किया गया है। इसके अलावा सेंट्रल सेल्स टैक्स के मुआवजे के रूप में राज्य सरकार के 1100 करोड़ रुपये केंद्र केपास हैं।
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की नजर प्रदेश के प्राइमरी सेक्टर पर भी है, जहां रोजगार की उपलब्धता तो 51.3 फीसदी है, लेकिन राज्य केजीडीपी में वर्ष 2013-14 के दौरान उसका योगदान केवल 15.3 फीसदी ही रहा है। नए बजट में वित्त मंत्री प्राइमरी क्षेत्र में नौकरियों के मुकाबले बागवानी, डेयरी फार्मिंग जैसे उत्पादकता वाले क्षेत्रों को बढ़ावा देकर युवाओं को प्रोत्साहित कर सकते हैं।