चंडीगढ़ नगर निगम को अब बिजली विभाग से इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी का 26 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलेगा। वहीं निगम में शामिल 13 गांव में विकास कार्यों के लिए भी नगर निगम नए सिरे से खाका तैयार कराएगा, जिसमें प्रशासन व निगम के कार्यों का ब्योरा बनाकर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के सामने पेश किया जाएगा। दिल्ली चतुर्थ हाई कमीशन की रिपोर्ट पर भी प्रशासन केंद्र को रिमाइंडर भेजेगा।
नगर निगम आयुक्त केके यादव ने बुधवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा के सामने निगम के बजट की प्रस्तुति दी। आयुक्त ने बताया कि निगम ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 1627 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया है। इसमें कैपिटल हेड में 443 करोड़ रुपये और रेवेन्यू हेड में 1184 करोड़ का बजट रखा है।
निगम ने पानी और सीवरेज सेस से 150 करोड़, प्रापर्टी टैक्स से 40 करोड़, हाउस टैक्स से 15 करोड़ और नगर निगम के अन्य विभागों में आने वाली रसीद से 130 करोड़ रुपये आने का दावा किया था। इसके अलावा दिल्ली चतुर्थ हाईकमीशन की रिपोर्ट से मिलने वाले फंड का भी जिक्र किया गया है। प्रशासक ने स्पष्ट किया कि प्रशासन से उन्हें 500 करोड़ का बजट दिया जाएगा। इसके अलावा 26 करोड़ रुपये इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के मिल जाएंगे। रही बात रिपोर्ट की उसके लिए रिमाइंडर भेज दिया जाएगा।
प्रशासक ने आयुक्त से कहा है कि 13 गांव में विकास कार्यों के लिए भी खाका तैयार करें। इसमें प्रशासन के स्तर और निगम के स्तर पर होने वाले कार्यों का जिक्र कर रिपोर्ट तैयार करके दें। ज्ञात हो कि फंड की समस्या को लेकर निगम हमेशा प्रशासन के सामने आपत्ति जताता रहा है। इसे लेकर पहली बार प्रशासक ने निगम से बजट की प्रस्तुति देने को कहा था।
निगम की संपत्ति लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने का आश्वासन
नगर निगम की करोड़ों की संपत्ति शहर में खाली पड़ी है। इस संपत्ति को निगम लीज पर द सकता है। रेट ज्यादा होने के कारण लोग इन संपत्तियों की ओर रुचि नहीं दिखाते हैं। इसे लेकर सदन में भी कई बार प्रस्ताव लाया जा चुका है, लेकिन प्रशासन हर बार प्रस्ताव ठुकरा देते है। इसे लेकर भी आयुक्त ने प्रशासक के सामने प्रस्तुति दी। प्रशासक ने इस सम्बंध में सलाहकार व वित्त सचिव से चर्चा करके जबाव देने को कहा है। प्रशासक ने कहा कि इस संबंध में अच्छा निर्णय लेंगे।
अतिरिक्त फंड देने पर रिवाइज्ड एस्टीमेट में होगा विचार
आयुक्त ने प्रस्तुतिकरण में बताया कि निगम के पास सेवा कार्य वाले विभाग ज्यादा हैं, लेकिन वित्त कमाने वाले विभाग कम हैं। इसलिए प्रशासन से जो बजट मिलता है और अपने विभागों से जो वित्त आता है, आवश्यक कार्यों में ही खप जाता है। इससे निगम की बचत नहीं हो पाती है और विकास कार्य के लिए अतिरिक्त बजट ही नहीं बचता। इस पर प्रशासक ने कहा कि अतिरिक्त बजट के बारे में रिवाइज्ड एस्टीमेट में देखा जाएगा।
प्रशासक ने हमें अपने खर्चे व राजस्व के बारे में बताने को कहा था। प्रस्तुतिकरण में हमने सभी विभागों का ब्योरा दे दिया है। वहां से हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। जल्द वित्त से संबंधी समस्याओं का निराकरण होगा। - केके यादव, निगम आयुक्त
हमने प्रशासक के सामने वित्तीय संकट के बारे में चर्चा की थी। प्रशासक ने हमारा पूरा पक्ष सुना है। लीज होल्ड से फ्री होल्ड संपत्ति करने और गांव की समस्या के लिए उन्होंने सुझाव भी मांगा है। किसी भी स्थिति में निगम में वित्त का संकट नहीं होगा। - रविकांत शर्मा, मेयर