केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ के लिए पास बजट में 100 करोड़ रुपये की कटौती कर ली है। इस पर प्रशासन ने भी नगर निगम के प्लान और नॉन प्लान बजट की ग्रांट में 58 करोड़ रुपये की कैंची चला दी है।
इससे नगर निगम की ओर से चल रहे प्रोजेक्टों पर संकट छा गया है। अब नगर निगम को इन प्रोजेक्टों के लिए बैंक में जमा अपनी एफडी की तरफ रुख करना पड़ेगा। वहीं इस कटौती के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है।
कांग्रेस ने इसे प्रशासन और भाजपा सांसद किरण खेर की साजिश का नतीजा बताया। उनका कहना है कि कांग्रेस शासित नगर निगम को बदनाम करने के लिए ऐसा किया गया है।
पहली बार नॉन प्लान बजट में भी कटौती :
नगर निगम के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब नॉन प्लान की भी ग्रांट काट ली गई है। इसकी अंतिम किस्त में 59.34 करोड़ रुपये आने थे लेकि न प्रशासन ने निगम को 37.59 करोड़ रुपये ही भेजने का आश्वासन दिया है। करीब 22 करोड़ रुपये की ग्रांट कटने की सूचना प्रशासन ने सोमवार को निगम को भेजी है। वही प्लान बजट में 36.65 करोड़ रुपये की कटौती की है। पिछले साल केंद्र सरकार ने नॉन प्लान बजट के लिए 2730.25 करोड़ और प्लान बजट के लिए 812.85 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर की थी।
नॉन प्लान बजट से दिया जाता है वेतन :
प्लान बजट शहर के विकास कार्यों पर खर्च किया जाता है। वहीं नॉन प्लान बजट सरकारी कर्मचारियों को हर माह मिलने वाले वेतन पर खर्च किया जाता है। निगम अपने कर्मचारियों को हर माह 12 करोड़ रुपये का भुगतान करता है। इसके अलावा शहरवासियों को पानी, सफाई, पार्कों के रखरखाव जैसी सुविधाओं के लिए भी इसी से खर्च होता है।