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निगम के बजट में सरकार ने की 58 करोड़ की कटौती

Wed, 25 Feb 2015 08:20 AM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ के लिए पास बजट में 100 करोड़ रुपये की कटौती कर ली है। इस पर प्रशासन ने भी नगर निगम के प्लान और नॉन प्लान बजट की ग्रांट में 58 करोड़ रुपये की कैंची चला दी है।
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इससे नगर निगम की ओर से चल रहे प्रोजेक्टों पर संकट छा गया है। अब नगर निगम को इन प्रोजेक्टों के लिए बैंक में जमा अपनी एफडी की तरफ रुख करना पड़ेगा। वहीं इस कटौती के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है।

कांग्रेस ने इसे प्रशासन और भाजपा सांसद किरण खेर की साजिश का नतीजा बताया। उनका कहना है कि कांग्रेस शासित नगर निगम को बदनाम करने के लिए ऐसा किया गया है।
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पहली बार नॉन प्लान बजट में भी कटौती :
नगर निगम के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब नॉन प्लान की भी ग्रांट काट ली गई है। इसकी अंतिम किस्त में 59.34 करोड़ रुपये आने थे लेकि न प्रशासन ने निगम को 37.59 करोड़ रुपये ही भेजने का आश्वासन दिया है। करीब 22 करोड़ रुपये की ग्रांट कटने की सूचना प्रशासन ने सोमवार को निगम को भेजी है। वही प्लान बजट में  36.65 करोड़ रुपये की कटौती की है। पिछले साल केंद्र सरकार ने नॉन प्लान बजट के लिए 2730.25 करोड़ और प्लान बजट के लिए 812.85 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर की थी।
 

नॉन प्लान बजट से दिया जाता है वेतन :
प्लान बजट शहर के विकास कार्यों पर खर्च किया जाता है। वहीं नॉन प्लान बजट सरकारी कर्मचारियों को हर माह मिलने वाले वेतन पर खर्च किया जाता है। निगम अपने कर्मचारियों को हर माह 12 करोड़ रुपये का भुगतान करता है। इसके अलावा शहरवासियों को पानी, सफाई, पार्कों के रखरखाव जैसी सुविधाओं के लिए भी इसी से खर्च होता है।
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आगामी बजट में भी कटौती के आसार

केंद्र सरकार नए बजट सत्र के लिए शहर को मिलने वाली ग्रांट को भी कम कर सकती है। इस पर  प्रशासन भी निगम की ग्रांट में कटौती कर देगा।

380 करोड़ की है एफडी:
नगर निगम प्रशासन से वर्तमान बजट सत्र की अंतिम किस्त का इंतजार कर रहा था। किस्त में देरी होने से निगम एफडी तुड़वाकर काम कर रहा था। उसे उम्मीद थी कि ग्रांट आने पर फिर से एफडी को मजबूत कर दिया जाएगा। ऐसे में अगले दिनों में फिर से एफडी टूटने की उम्मीद बढ़ गई है। इस समय नगर निगम के पास 380 करोड़ रुपये की एफडी है जो कि 4 साल पहले तक 500 करोड़ रुपये की थी।

यह सांसद का पहला तोहफा: चावला
वित्त एवं अनुबंध कमेटी के सदस्य एवं पूर्व मेयर सुभाष चावला का कहना है कि यह किरण खेर का सांसद बनने का पहला तोहफा नगर निगम और शहर को मिल गया है। इस कटौती से यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य में शहर के विकास कार्य रुकते रहेंगे। यह प्रशासन और किरण खेर की कांग्रेस शासित नगर निगम की छवि धूमिल करने की साजिश है। विकास कार्य रुकने पर सभी कांग्रेस शासित नगर निगम को जिम्मेदार मानेंगे।

पूनम शर्मा, मेयर ने कहा कि निगम की ग्रांट रुकना चिंता का विषय है। मैं समय-समय पर प्रशासन के अधिकारियों से बात करती रही हूं। मैं प्रशासन से ग्रांट बहाल करवाने का प्रयास करूंगी। अगर जरूरी हुआ तो दिल्ली जाकर वित्त मंत्रालय में बात करूंगी।

संजय टंडन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि मुझे बजट में कटौती की जानकारी नहीं है।

इस समय इन प्रोजेक्ट्स पर हो रहा है काम
. सेक्टर-17 की मल्टीलेवल पार्किंग
. नगर निगम की इमारत का निर्माण
. सेक्टर-38 में महिला भवन का निर्माण
. सेक्टर-17 के बस स्टैंड चौक पर प्रस्तावित अंडरपास, जिसका निर्माण कार्य अगले सत्र में शुरू होना है
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