वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से सोमवार को पेश आम बजट सही मायनों में कृषि क्षेत्र पर केंद्रित रहा। स्कूल और उच्च शिक्षा शिक्षा की बेहतरी के लिए भी बजट में काफी जगह दी गई है। देश के आर्थिक विकास के लिए कृषि और शिक्षा दो प्रमुख क्षेत्र हैं।
देश के आम बजट को लेकर पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) अर्थशास्त्र विभाग के सीनियर प्रोफेसर और जाने-माने अर्थशास्त्री प्रो. एमआर खुराना ने अमर उजाला के साथ बजट के पॉजिटिव और नेगेटिव पक्ष पर अपनी बेबाक राय रखी। प्रो. खुराना के अनुसार देश की 48 फीसदी जनता कृषि पर निर्भर है।
देश की जीडीपी में भी खेती का योगदान लगातार कम होता जा रहा है, जिसका सबसे बड़ा कारण खेती में लागत अधिक और मुनाफा कम हो रहा है। किसान अब दूसरे धंधों की तरफ रुख कर रहे थे। ऐसे में किसानों के लिए बजट एक टॉनिक का काम करेगा।
आम बजट में खेतीबाड़ी पर काफी फोकस किया है। मनरेगा के लिए 36 हजार 500 करोड़ की राशि से निचले तबके के लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मोदी सरकार ने बजट में ग्रामीण डेवलेपमेंट पर पूरा ध्यान दिया है। प्रो. खुराना के अनुसार देश में किसान कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर रहे हैं। किसानों के लिए बीमा योजना शुरू करना एक बेहतर कदम है।
प्रो. खुराना के अनुसार बजट में मध्यमवर्गीय लोगों के लिए बहुत ज्यादा रियायतें नहीं दी गईं हैं, लेकिन देश में टैक्स देने वालों की बड़ी संख्या इसी वर्ग की है। महंगी गाड़ियों और सिगरेट जैसी चीजों पर टैक्स बढ़ाने का फैसला बिल्कुल सही है। प्रो. खुराना के अनुसार बजट में शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए 1 हजार करोड़ की राशि मिलना स्वागत योग्य है, लेकिन इस राशि में ओर इजाफा किया जाना चाहिए था।
देश में 10 वर्ल्ड क्लास एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स शुरू करने से देश में एजुकेशन का स्तर बढ़ेगा। हेल्थ सेक्टर के लिए भी ओर बजट दिया जाना चाहिए था। बजट में पहला घर खरीदने पर छूट और हाउस रेंट की सीमा 24 से 60 हजार किए जाने से कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी। बजट से हाउसिंग सेक्टर में तेजी आने की उम्मीद है। कुल मिलाकर मोदी सरकार के बजट में काफी संतुलन दिखाई देता है। रिपोर्ट -(सुमित सिंह श्यौराण से बातचीत पर आधारित)