केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से वर्ष 2017-18 के लिए बुधवार को संसद में पेश किए गए आम बजट में तय निर्देशों के अनुसार सरकार ने कोई भी ऐसी घोषणा नहीं की, जिससे पंजाब सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव में वोटरों को लुभाया जा सके।
हालांकि, वित्त मंत्री ने बजट में कृषि, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, ढांचागत विकास के क्षेत्रों के लिए एकमुश्त राशि का एलान करते हुए नए वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी बढ़ने, मंहगाई दर घटने का दावा करते हुए आयकर में मध्यम वर्ग को राहत दी है। लेकिन इस बार आम बजट में राज्य विशेष के लिए कोई घोषणा नहीं होने से, बजट को ‘क्या मंहगा क्या सस्ता’ के रूप में समझने वाले साधारण लोग निराश हैं।
पहली बार रेल और आम बजट को संयुक्त रूप में पेश करती सरकार की यह मजबूरी थी कि उसे भारतीय चुनाव आयोग ने एक फरवरी को बजट पेश करने की अनुमति केवल इस शर्त पर दी थी कि बजट में कोई भी ऐसी घोषणा न की जाए, जिससे पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव में वोटर प्रभावित हों।
आयकर में मध्यम वर्ग को राहत नहीं करा सकती वोटों की बारिश
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पंजाब के परिपेक्ष्य में इस बजट का अवलोकन किया जाए, तो पंजाब वासियों को यह बजट प्रभावशाली नहीं लगा। इसका मुख्य कारण है कि पंजाब की जो समस्याओं और जरूरतें पिछले कई सालों से लंबित हैं, उनके निदान को लेकर यह बजट पूरी तरह चुप है।
बजट में जिन मदों के लिए केंद्र सरकार ने भारी भरकम राशि का प्रस्ताव किया है, उन मदों से जुड़ी पंजाब की जरूरतों को कितना पैसा मिलेगा, बजट में साफ नहीं है। दरअसल, पंजाब लंबे समय से औद्योगिक विकास, कर्ज के चलते किसानों की आत्महत्याएं, खेती की बढ़ती लागत और न्यूनतम समर्थन मूल्यों में इजाफे की मांग के साथ-साथ ढांचागत विकास की कई परियोजनाओं के लिए केंद्र का मुंह देखता रहा है।
नए वित्त वर्ष में भी प्रदेशवासियों को केंद्र से राहत की उम्मीद थी, लेकिन बजट में कुछ भी साफ नहीं हो सका। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कृषि क्षेत्र में राशि बढ़ाई है, लेकिन यह बजट किसानों की कर्ज माफी पर खामोश है। मनरेगा में भी पैसा बढ़ाया गया है लेकिन पंजाब में मनरेगा योजना प्रति व्यक्ति आय के चलते पहले ही असफल हो चुकी है।