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Budget 2017: पंजाब की उम्मीदों पर भारी पड़ा 'अच्छे दिनों' का बजट

Thu, 02 Feb 2017 09:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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वित्तमंत्री अरुण जेटली - फोटो : PTI
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पंजाब के लिए इस साल के बजट का अवलोकन किया जाए, तो पंजाब वासियों को यह बजट प्रभावशाली नहीं लगा। इसका मुख्य कारण है कि पंजाब की जो समस्याओं और जरूरतें पिछले कई सालों से लंबित हैं, उनके निदान को लेकर यह बजट पूरी तरह चुप है।
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पहली बार रेल और आम बजट को संयुक्त रूप में पेश करती सरकार की यह मजबूरी थी कि उसे भारतीय चुनाव आयोग ने एक फरवरी को बजट पेश करने की अनुमति केवल इस शर्त पर दी थी कि बजट में कोई भी ऐसी घोषणा न की जाए, जिससे पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव में वोटर प्रभावित हों।
 
रेलवे
- सरहदी जिलों में ढांचागत विकास के लिए केंद्रीय परियोजनाओं की मांग राज्य सरकार की ओर से की जाती रही है। बजट में देश की सीमा से सटे राज्यों के इलाकों के विकास को लेकर कोई अलग घोषणा नहीं की गई है। पंजाब के सरहदी जिलों में रेलवे के विस्तार की मांग लंबे समय से की जा रही है। इनमें पठानकोट-गुरदासपुर रेलवे लाइन को डबल करने, गुरदासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने, फिरोजपुर से चंडीगढ़ ट्रेन को फाजिल्का से चलाने, फाजिल्का से हरिद्वार के लिए सीधी ट्रेन, जलालाबाद-मुक्तसर नई रेल लाइन, जालंधर व जालंधर कैंट स्टेशनों के आधुनिकीकरण, फरीदकोट में छह रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग, राजपुरा-मोहाली रेल लाइन का बाकी 14 किमी. हिस्सा पूरा कर चंडीगढ़ को सीधे मालवा से जोड़ने की मांगों के अलावा मोगा-कोटकपूरा, नवांशहर-अमृतसर नई रेललाइन की मांग पर बजट चुप है।
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'फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर भी बजट खामोश'

- फोटो : File Photo
उद्योग
- पंजाब में साइकिल, हौजरी, लोहा इंडस्ट्री लंबे समय से करों में राहत की मांग करती रही है। इस दौरान पंजाब सरकार भी केंद्र के समक्ष यह मांग बार-बार उठाती रही है कि पड़ोसी हिमाचल को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद से पंजाब के उद्योग हिमाचल स्थानांतरित होने लगे हैं। इसके चलते सूबे की सरकार पंजाब को भी विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करती रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नए बजट में व्यापारियों के लिए कुछ राहतों की घोषणा तो की है, लेकिन पंजाब के व्यापारी इसे पर्याप्त नहीं मान रहे। पंजाब से उद्योगों का पलायन रोकने और नए उद्योगों का आगमन प्रशस्त करने को लेकर बजट में कोई अप्रत्यक्ष घोषणा भी नहीं है। 

कृषि
- पंजाब में छोटी होती जोत, फसलों को न्यूनतम मूल्य में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं होने और कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्याएं सबसे बड़ा मुद्दा है। मौजूदा विधानसभा चुनाव में यह मुद्दे राजनीतिक दल अपनी चुनावी सभाओं में भी लगातार उठा रहे हैं। वीरवार को घोषित आम बजट में मोदी सरकार ने देश के किसानों को लाखों रुपये के कर्ज मुहैया कराने के लिए इस मद में पैसा बढ़ाया है, लेकिन पूरे बजट में किसानों के पिछले कर्ज माफ करने को लेकर कोई जिक्त्रस् नहीं है। पंजाब में किसानों की कर्ज माफी की मांग लंबे समय से उठती रही है और पंजाब सरकार भी समय-समय पर केंद्र से इस मद में मदद मांगती रही है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर भी बजट खामोश है। फसलों की लागत बढ़ने से किसानों की क्रय शक्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर एग्री बिजनेस पर पड़ रहा है। आम बजट में इस ओर भी ध्यान नहीं दिया गया।
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