परिजनों के अनुसार विजेंद्र 1989 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। फरवरी में बेटी की शादी के बाद मार्च में ड्यूटी पर गए थे। एक महीना पहले कुछ दिनों की छुट्टी पर आए थे। विजेंद्र की पत्नी मीना के अनुसार, रोजाना उनकी फोन पर बात होती थी लेकिन उन्होंने कभी ऐसा कुछ नहीं बताया कि वे किसी बात को लेकर परेशान हैं। ऐसे में आत्महत्या की बात किसी गले के नीचे नहीं उतर रही है।
बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार विजेंद्र के पास इंसास रायफल थी। यह ऑटोमेटिक हथियार होता है। इससे एक बार में कई गोलियां चल सकती हैं। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इंसास रायफल से तीन राउंड का बर्स्ट फायर हुआ है। फिलहाल बीएसएफ को भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
बीएसएफ और हरियाणा पुलिस की टुकड़ी ने दी सलामी
शाम करीब साढ़े छह बजे विजेंद्र का शव भिवानी रोड स्थित उनके घर लाया गया। इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए पैतृक गांव ईगराह ले जाया गया। यहां दिल्ली के छावला से आई बीएसएफ की टुकड़ी और हरियाणा पुलिस की टुकड़ी ने सलामी दी।