चंडीगढ़। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत शुरू किए गए स्मार्ट-बाइक प्रोजेक्ट अब अपनी उपयोगिता खोता दिख रहा है। शहर में पब्लिक बाइसाइकिल शेयरिंग के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करके खरीदी गई 5000 ई-साइकिलें अब बेकार और टूटी हालत में पड़ी हैं।
हालत यह है कि मनीमाजरा के शिवालिक गार्डन के आसपास रखी गई साइकिलें जर्जर हालत में खड़ी और जमीन पर गिरी दिखाई देती हैं। ऐसा लगता है कि इनकी देखरेख मानो महीनों से किसी ने नहीं की हो। ऐसे हालात पूरे शहर में कई जगह पर है। शहर लोगों का कहना है कि यह सुविधा जनहित की बजाय करदाताओं के पैसे की बर्बादी बन चुकी है।
चंडीगढ़ प्रशासन ने 5 चरणों में करीब 5000 स्मार्ट साइकिलें खरीदीं और शहर के 617 स्थानों पर इस्तेमाल के लिए रखीं। यह प्रोजेक्ट प्राइवेट कंपनी स्मार्ट-बाइक के साथ पीपीपी मॉडल पर चलाया गया। दिसंबर 2020 में 250 साइकिलों से शुरुआत हुई। अगस्त 2021 और फरवरी 2022 में 1250-1250 साइकिलें खरीदी गईं। इसके बाद 2023 में फिर 1250 और आखिरी चरण में भी 1250 साइकिलें खरीदी गईं। प्रशासन का दावा था कि इससे शहर में पर्यावरण-अनुकूल और सस्ती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली।
ताजा आंकड़ों ने इस प्रोजेक्ट की पोल खोलकर रख दी है। अगस्त 2024 तक करीब 892 साइकिलें पूरी तरह नाकारा हो चुकी थीं। 282 साइकिलें चोरी हो चुकी थीं। वर्ष 2025 की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1500 साइकिलें खराब पड़ी हैं, जिनमें से 700 इतनी जर्जर हैं कि उनकी मरम्मत भी संभव नहीं। सिस्टम को सुधारने की बजाय प्रोजेक्ट को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीया ने कहा तकनीकी खामियों ने भी उपयोगकर्ताओं की कमर तोड़ दी। तकनीकी जानकारी न रखने वाले लोग ऐप आधारित लॉक प्रणाली के कारण साइकिलों का उपयोग कर ही नहीं पाए। कई क्षेत्रों में नेटवर्क न चलने के कारण लॉक खुलना असंभव हो जाता था। नतीजतन लोग साइकिल लेने की कोशिश में परेशान होते रहे, जबकि साइकिलें उपयोग में ही नहीं आ सकीं।
स्थानीय निवासी कमलेश का सवाल है कि जब साइकिलें लंबे समय से खराब हैं तो इतनी बड़ी खरीद का जिम्मेदार कौन है। प्रशासन ने बिना सोचे-समझे या किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ाया, जिसका सीधा नुकसान जनता के पैसे को हुआ।
मनीमाजरा ईडब्ल्यूए के चेयरमैन सुभाष धीमान ने कहा कि क शिवालिक गार्डन के पास पड़े जर्जर साइकिल स्टैंड और टूटी-फूटी बाइकों को देखकर साफ है कि प्रोजेक्ट पूरी तरह फ्लॉप साबित हो चुका है।
चंडीगढ़ माइनॉरिटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन आसिफ चौधरी का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि सभी बेकार साइकिलों को इकट्ठा कर नीलामी के जरिए बेच दिया जाए ताकि कम से कम कुछ राजस्व वापस मिल सके। उन्होंने मांग है कि इस प्रोजेक्ट की उच्चस्तरीय जांच हो और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में जनता के टैक्स का दुरुपयोग न हो।