रिश्वत मामले में फंसे पंजाब टेक्निकल एजूकेशन एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर नगिंद्र सिंह भाटिया को जिला अदालत ने मंगलवार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
संगरूर निवासी तरसेम ने 28 सितंबर 2005 को पंजाब विजिलेंस को शिकायत दी थी कि वे संगरूर में आर्ट एंड क्राफ्ट टीचर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट चला रहे थे।
इंस्पेक्शन कमेटी ने उनके इंस्टीट्यूट की जांच की और मान्यता रद्द करने की सिफारिश की। मान्यता रद्द न करने को लेकर उन्होंने सेक्टर-36 स्थित पंजाब टेक्निकल एजूकेशन एंड ट्रेनिंग डिपार्टमेंट के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर नगिंद्र सिंह भाटिया से संपर्क किया।
डिप्टी डायरेक्टर ने मान्यता रद्द न करने की एवज में डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मांगी। रिश्वत की आधी रकम पहले और आधी काम होने के बाद देने का सौदा तय हुआ।
शिकायत मिलने के बाद पंजाब विजिलेंस पटियाला की टीम ने सेक्टर-36 स्थित डिप्टी डायरेक्टर के दफ्तर में ट्रैप लगाया।
पंद्रह हजार कैश और 50 हजार का चेक लेकर शिकायतकर्ता तरसेम सिंह डिप्टी डायरेक्टर के आफिस में गया। इस दौरान पंजाब विजिलेंस टीम ने भाटिया को गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था।
अदालत में बचाव पक्ष के वकील राजन मलहोत्रा ने बताया कि संबंधित मान्यता प्रदान करने की पावर नगिंद्र सिंह भाटिया के पास नहीं बल्कि तकनीकी शिक्षा मंत्री के हाथ में थी।
साथ ही मामले में ट्रैप के दौरान मौजूद तरसेम का दोस्त और इंस्टीट्यूट का सदस्य हरबीर सिंह अदालत में बयानों से पलट गया था।