रिश्वत मामले में जिला अदालत से दोषी करार यूटी पुलिस के एसआई संजीव कुमार को यूटी पुलिस विभाग ने बीते बुधवार को बर्खास्त कर दिया। बीती 26 अप्रैल को अदालत ने एसआई संजीव कुमार सहित सेक्टर-17 मार्केट के पूर्व प्रधान सुभाष कटारिया को आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी करार देकर दो-दो साल की सजा सुनाई थी। तीन साल से कम सजा होने पर दोनों को 25-25 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर जमानत मिली थी।
जिला अदालत के फैसले के खिलाफ एसआई संजीव कुमार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की हुई है। अब वे अपने बर्खास्तगी आदेश पर स्टे के लिए भी हाईकोर्ट में अलग से अपील करेंगे। इस मामले के तीसरे आरोपी सेवानिवृत्त आरोपी रमेश चंद को सबूतों के अभाव में बरी किया गया था। 7 नवंबर 2008 को पचास हजार रुपये रिश्वत मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दर्ज केस में जिला अदालत ने 164 सुनवाइयों के बाद फैसला सुनाया था।
यह था मामला
7 नवंबर, 2008 के दर्ज केस के अनुसार अरविंद कुमार पांडे ने अपना बूथ गारमेंट डीलर दीनानाथ मिश्रा को किराए पर दिया था। पांडे और मिश्रा में अक्तूबर 2008 में बूथ को लेकर झगड़ा हुआ। मिश्रा ने सिविल केस फाइल किया। तीन नवंबर 2008 को मिश्रा का पांडे के साथ समझौता हुआ और कोर्ट का फैसला आने तक बूथ की चाबियां मार्केट प्रधान सुभाष कटारिया के पास रहना तय हुआ। यह समझौता एसआई संजीव कुमार की मौजूदगी में हुआ।
इसी बीच मिश्रा की अर्जी पर कोर्ट ने मामले में ‘स्टेटस को’ का फैसला सुना दिया। पांडे ने 5 नवंबर को संजीव कुमार और सुभाष कटारिया के खिलाफ सीबीआई को शिकायत दी। कहा कि ये दोनों मामला सेटल करने और बूथ खाली करवाने के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत पर 7 नवंबर 2008 को सीबीआई ने ट्रैप लगा कर दोनों को गिरफ्तार किया। सीबीआई की तरफ से कोर्ट में दायर चार्जशीट में रमेश चंद को आरोपी बनाया था, लेकिन उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था। पुलिस विभाग ने 12 नवंबर 2008 को संजीव कुमार को सस्पेंड किया लेकिन 7 मई 2010 को उन्हें बहाल कर दिया गया था।