बद्दी, हिमाचल प्रदेश निवासी रुचि पंथ ने बहादुरी की मिसाल पेश करते हुए अपने पति की दोनों किडनियां दान कर नव वर्ष पर दो जिंदगियों को नया तोहफा दिया है। पीजीआई में इलाज के दौरान उनके पति कैलाश पंथ को 28 दिसंबर को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद रुचि ने उनकी दोनों किडनियां पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल दो मरीजों को दान करने का फैसला लिया।
कैलाश (42) बद्दी स्थित एक कंपनी में कार्यरत थे। 19 दिसंबर को अचानक उन्हें ब्रेन हैमरेज हुआ। परिवार ने पीजीआई में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान 28 दिसंबर को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। उनके अंगदान के लिए पीजीआई रोटो के काउंसर ने उनकी पत्नी से संपर्क किया। रुचि पंथ का कहना है कि पति के जाने के बाद मेरे और बच्चों के लिए उस क्षति की पूर्ति कोई नहीं कर सकता, लेकिन मेरे पति के अंगदान की बदौलत शायद किसी बच्चे को उसके बीमार पिता का साथ मिल जाए और किसी पत्नी को उसका पति मिल जाए।
पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम का कहना है कि पंथ परिवार की नेकी की ही बदौलत जिदंगी-मौत से जूझ रहे दो मरीजों को नया जीवन मिल पाया है। वहीं, रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि 2019 में 73 अंग प्राप्त हुए हैं। इनसे 69 लोगों की जान बचाई गई है। सबसे ज्यादा संख्या 60 किडनी की है। इसके अलावा 668 कार्निया प्राप्त हुई हैं। अंगदान को लेकर जागरूकता का स्तर दिनों दिन तेजी से बढ़ रहा है जिसका असर पीजीआई रोटो में दिखाई दे रहा है।