चंडीगढ़। जीएसटी के नए स्लैब लागू होने के बाद कपड़ा बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। ज्यादातर सेक्टरों को राहत मिली है लेकिन ब्रांडेड कपड़ों के शौकीनों की जेब पर अब ज्यादा बोझ पड़ने लगा है। खासकर सर्दियों के मौसम में ऊनी और गर्म कपड़ों की मांग बढ़ने के बीच दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है।
नए नियमों के तहत अब 2500 रुपये तक के कपड़ों पर 5 फीसदी जीएसटी और 2500 रुपये से ऊपर के कपड़ों पर 18 फीसदी जीएसटी देना होगा। पहले 1000 रुपये से अधिक कीमत वाले सभी कपड़ों पर केवल 12 फीसदी जीएसटी लागू होती थी। इस बदलाव के बाद खासतौर पर ब्रांडेड और ऊनी कपड़ों की कीमतों में 6 फीसदी तक की वृद्धि हो गई है।
रेडीमेड कपड़ों के होलसेल कारोबारी हरकरण सिंह ने बताया कि सर्दी के मौसम में ऊनी कपड़ों की सबसे ज्यादा मांग होती है। ऐसे कपड़े सामान्य तौर पर महंगे होते हैं। अब अगर कोई ग्राहक 2500 रुपये का कपड़ा खरीदता है तो उसे करीब 150 रुपये अतिरिक्त जीएसटी देना पड़ रहा है।
खरीदारी पर पड़ेगा असर
हरकरण सिंह का कहना है कि इससे ग्राहकों की खरीदारी पर सीधा असर पड़ेगा। जो ग्राहक केवल जरूरत के हिसाब से खरीदारी करते हैं वे तो लेंगे लेकिन जो पहले अतिरिक्त कपड़े खरीद लेते थे, वे अब सोच-समझकर ही खर्च करेंगे। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई का असर ठंड के कारोबार पर पड़ सकता है। कई ब्रांड पहले से दामों में संशोधन कर चुके हैं जिससे ग्राहकों को अब पुरानी दरों पर खरीदारी करना मुश्किल होगा।
10 हजार तक 5 फीसदी जीएसटी लगाना चाहिए था
सेक्टर-17 मार्केट के कारोबारी राज बंसल का कहना है कि कई कंपनियों ने अपना रेट बढ़ा दिया है। अब 5 से 7 हजार रुपये तक में ठीकठाक जैकेट आते हैं। सरकार को चाहिए था कि कम से कम 10 हजार रुपये तक के कपड़ों पर 5 फीसदी जीएसटी लगाए। इसमें बड़े वर्ग को फायदा होता। खासकर ठंड के कपड़े महंगे आते हैं। इसके अलावा अगर होल सेल कारोबारी रिटेलर को 2400 रुपये में कोई कपड़ा देता है और खुदरा कारोबारी 2600 रुपये में इसको बेचता है तो भी 18 फीसदी जीएसटी लग जाएगा। इसमें कस्टमर को नुकसान है।
2500 रुपये से नीचे के कपड़े बेचने वालों को मिला फायदा
सेक्टर-37 सी मार्केट के कारोबारी नरेश साहनी का कहना है कि 2500 रुपये से ऊपर के कपड़े जरूर महंगे होंगे लेकिन 2500 रुपये तक 5 फीसदी जीएसटी देने से एक बड़े वर्ग को फायदा भी हुआ है। उनके यहां ज्यादातर कस्टमर ऐसे ही आते थे। पुराने स्लैब में 1000 से ऊपर का कपड़ा होने पर 12 फीसदी जीएसटी देनी पड़ता था। अब 7 फीसदी कम करते हुए उसको 5 फीसदी वाले स्लैब में कर दिया गया है। इससे छोटे कारोबारियों के ज्यादा फायदा होगा।
कहां कितना ज्यादा देना होगा जीएसटी
2500 रुपये पर - 150 रुपये
5000 रुपये पर - 300 रुपये
8000 रुपये पर - 480 रुपये
10 हजार रुपये पर - 600 रुपये
15 हजार रुपये पर - 900 रुपये