चंडीगढ़। नेशनल इंटेग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) की सेंटर एग्जीक्यूटिव मीट-2023 का आयोजन रविवार को सेक्टर 35 के लोकल बॉडी बिल्डिंग में हुई। इसमें देश-विदेश के लगभग 300 आयुर्वेद विशेषज्ञ शामिल हुए। उन्होंने सम्मेलन में हर दिन हर घर आयुर्वेद पर मंथन करते हुए उसे सफल बनाने के लिए रोडमैप तैयार किया। विशेषज्ञों ने कहा कि हर दिन हर घर आयुर्वेद का संदेश प्रत्येक भारतीय के जीवन का अंग होना चाहिए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेशनल कमिशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. राकेश शर्मा और विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. बी एल मेहरा, गुरु रविदास यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर राहुल गुप्ता, श्रीकृष्ण आयुष यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. केएस धीमान, आयुर्वेदिक युनानी सिस्टम ऑफ मेडिसिन के रजिस्ट्रार डॉक्टर संजीव गोयल मौजूद रहे। डॉ. संजीव गोयल ने कहा कि प्रकृति का अस्तित्व बचने पर ही मनुष्य जीवित रह सकते हैं। हमें इसे गंभीरता से लेना होगा और यही प्रकृति के प्रति मानव समाज का सबसे बड़ा कर्तव्य होना चाहिए। पारंपरिक चिकित्सा अपनेआप में विज्ञान है। इसलिए हमें प्रकृति में निहित शक्ति, समृद्धि और संभावनाओं को समझने और आगे बढ़ने की जरूरत है। वैद्य राकेश शर्मा ने कहा कि 2014 में आयुष विनिर्माण उद्योग केवल 3 बिलियन डॉलर का था। यह पिछले 9 वर्षों में 8 गुना बढ़कर 24 बिलियन डॉलर का हो गया है। उन्होंने बताया कि 2047 तक आयुष क्षेत्र में 50 गुना वृद्धि करने का संकल्प लिया है। सम्मेलन को सफल बनाने में नीमा चंडीगढ़ की टीम से डॉ. मीनू गांधी, डॉ. विवेक आहूजा, डॉ. शैलेंद्र भारद्वाज, डॉ. गीता जोशी, डॉ. सुखजिंदर योगी और डॉ. विनोद बरनवाल का विशेष योगदान रहा।