मार्च में होने वाली बोर्ड की परीक्षाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। गवर्नमेंट स्कूल लेक्चरर यूनियन ने इन परीक्षाओं के बायकॉट का ऐलान किया है।
लेक्चरर्स ने चेतावनी दी है कि वे 10वीं और 12वीं की परीक्षा में पेपर व प्रैक्टिकल नहीं लेंगे। कॉपियां भी नहीं जांचेंगे। लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर अब लेक्चरर्स ने आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है।
लेक्चरर्स का कहना था कि पंजाब सरकार के आदेश के मुताबिक प्रिंसिपल पद पर प्रमोशन के लिए सभी कैडरों के पदों की संख्या के अनुपात में पदोन्नति दी जाए। प्रिंसिपल पद पर प्रमोशन तीन कैडरों लेक्चरर, हेड मास्टर और वोकेशनल लेक्चरर के द्वारा होता है।
यूनियन के मुताबिक पंजाब में लेक्चरर के 12,642 पद हैं, प्रमोशन में उनका कोटा 81 फीसदी बनता है, पर है सिर्फ 55 फीसदी। हेडमास्टरों के 1665 पदों से 11 फीसदी कोटा बनता है, पर उन्हें तीस फीसदी दिया गया है। जबकि, वोकेशनल लेक्चरर्स के 1225 पदों का कोटा आठ फीसदी बनता है, उन्हें 15 फीसदी दिया गया है।
इस संबंध में यूनियन ने पिछले साल काफी आंदोलन किया। शिक्षामंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने उनकी मांग पर सहमति जताई, पर बात आगे नहीं बढ़ी।
पिछले दिनों लेक्चरर्स ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से मुलाकात की, उन्होंने भी मांग पर सहमति जताते हुए कार्रवाई करने को कहा, लेकिन शिक्षा विभाग ने 314 हेडमास्टरों को प्रिंसिपल पद पर प्रमोट करने के लिए डीपीसी की मीटिंग कर ली।
लेक्चरर्स ने इसका विरोध करते हुए बुधवार रात को मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर धरना भी दिया था पर विभाग ने डीपीसी ने नहीं टाली।
यूनियन प्रधान हाकम सिंह ने कहा कि डीपीसी होने के बाद धरने का कोई मतलब नहीं है। अब यूनियन परीक्षाओं का मुकम्मल बायकॉट करेगी। वीरवार को भी 90 फीसदी लेक्चरर्स के सीएल पर होने के कारण प्री-बोर्ड परीक्षा प्रभावित हुई है।
-- 2003 से यही सिस्टम चला रहा है। जिस कैडर से पद खाली होते हैं, उसी कैडर से प्रमोशन द्वारा भरे जाते हैं। इस बार भी इसी नियम के अनुसार प्रमोशन केसों पर विचार किया गया है। लेक्चरर्स से मीटिंग कर उन्हें समझाने की कोशिश की जाएगी।
-- अंजलि भंवरा, प्रमुख सचिव, शिक्षा विभाग