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Chandigarh News: टूटी बोतल से गर्दन पर वार निश्चित तौर इरादतन हत्या, हाईकोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

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-सिरसा अदालत ने गैर इरादतन हत्या का मामला मान सुनाई थी 10 साल की सजा
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-सजा के खिलाफ अपील मंजूर, 21 साल बाद निचली अदालत का फैसला पलटा

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरसा की ट्रायल कोर्ट द्वारा 2003 में सुनाए गए आदेश के खिलाफ अपील मंजूर करते हुए फैसला पलटते हुए 10 साल की कैद को अब उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। हाईकोर्ट ने माना कि टूटी कांच की बोतल से गर्दन पर वार निश्चित तौर पर इरादतन हत्या का मामला है, गैर इरादतन हत्या का नहीं। 2003 में राजिंदर सिंह को हिसार की ट्रायल कोर्ट ने हत्या के आरोप से बरी करते हुए उसे गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराकर दस साल कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस आदेश को राजिंदर व हरियाणा सरकार दोनों ने अपील दाखिल करते हुए चुनौती दी थी। एफआईआर के अनुसार मृतक सहदेव और दोषी सिंह के बीच झगड़ा हुआ। राजिंदर सिंह ने सहदेव की गर्दन पर दो बार टूटी कांच की बोतल से वार किया। राजिंदर के वकील ने कोई सबूत न होने की दलील देते हुए उसे बरी करने की मांग की थी। प्रदेश सरकार ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि ट्रायल कोर्ट ने हत्या के आरोप से बरी करके गलती की है क्योंकि यह बार-बार चोट करने का मामला था। शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर चोटें पहुंचाई थी जो निश्चित तौर पर मृत्यु का कारण बना। इसलिए उसे हत्या के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए था न की गैर इरादतन हत्या के लिए। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकालने में गलती की थी कि यह हत्या या गैर-इरादतन हत्या है। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही साबित हुई थी और मृतक के शरीर की जांच करने वाले डॉक्टर ने कहा था कि टूटी बोतल से चोट लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मौत का कारण गर्दन और श्वास नली में चोट लगने के कारण सदमे व रक्तस्राव था। खंडपीठ ने आगे कहा कि डॉक्टर की रिपोर्ट को भी चुनौती नहीं दी गई। परिणामस्वरूप यह देखते हुए कि मृतक के शरीर पर लगी चोटें सामान्य प्रकृति में मृत्यु का कारण बनने के लिए पर्याप्त थी, हाईकोर्ट ने राजिंदर सिंह को हत्या का दोषी करार दिया और उसकी 10 साल की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
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