फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उधारी पड़ी भारी.. चंडीगढ़ में पंजाब के मरीजों का बंद हुआ आयुष्मान से इलाज

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब के मरीजों का आयुष्मान योजना के तहत चंडीगढ़ में इलाज बंद कर दिया गया है। इसका मुख्य कारण पंजाब सरकार द्वारा चंडीगढ़ में इलाज कराने वाले अपने मरीजों के इलाज पर खर्च हुए पैसे का भुगतान न करना है। भुगतान न मिलने से सबसे पहले जीएमसीएच-32 ने इलाज बंद किया था। इसके बाद 15 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग ने भी पंजाब के मरीजों का इलाज करने से हाथ खड़ा कर दिया। वहीं अब पीजीआई में भी पिछले दो दिनों से पंजाब के एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया है। हालांकि पीजीआई प्रशासन ने अभी इस संदर्भ में कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया है। फिर भी अधिकारियों के मौखिक आदेश का पालन करते हुए इमरजेंसी व अन्य यूनिटों में पंजाब के एक भी मरीज को भर्ती कर इलाज नहीं दिया जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को हो रही है। बुधवार को पीजीआई में पंजाब से कीमो कराने आए दर्जनों मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा।
विज्ञापन

बॉक्स
भर्ती मरीजों का जारी है इलाज
पीजीआई में पंजाब के किसी भी नए मरीज को आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत भर्ती नहीं किया जा रहा है लेकिन जो मरीज पहले से यहां भर्ती हैं उनका इलाज जारी रखा गया है। मौजूदा समय में पीजीआई के कार्डियक सेंटर, एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर, नेहरू अस्पताल, एडवांस आई सेंटर, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, एडवांस आई सेंटर और ऑन्कोलॉजी विभाग में पंजाब के 50 से ज्यादा मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। पीजीआई न्यू ओपीडी बिल्डिंग में बनाए गए आयुष्मान काउंटर पर बुधवार को इक्का-दुक्का मरीज ही नजर आए जबकि सामान्य दिनों में वहां योजना के अंतर्गत इलाज के लिए आने वाले मरीजों की लंबी कतार नजर आती थी। कर्मचारियों का कहना है कि वहां सबसे ज्यादा कीमो कराने वाले मरीज आते हैं क्योंकि निजी अस्पतालों में कीमो कराने का शुल्क काफी ज्यादा है। वहीं कीमो कराने आए पंजाब के एक मरीज ने बताया कि उसे 21 दिन पर कीमो कराना होता है, जो पीजीआई में काफी सस्ते दर पर हो जाता है। अब इसके लिए निजी अस्पताल में 3000 से 4000 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
बॉक्स
छह महीने से उधार पर हो रहा था इलाज
पंजाब सरकार ने छह महीने से अधिक समय पहले चंडीगढ़ को आयुष्मान भारत योजना का भुगतान रोक दिया था जिससे पहले जीएमसीएच-32, फिर स्वास्थ्य विभाग और अब पीजीआई में पंजाब के मरीजों का इलाज बंद कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार पंजाब सरकार पर योजना के तहत प्रतिपूर्ति के रूप में जीएमसीएच-32 का अब तक 2 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग का 30 लाख और पीजीआई का 16 करोड़ रुपये बकाया है।
विज्ञापन

इनसेट-
कहां से लाएं इलाज का खर्च
जीएमएसएच-16 के चिकित्सा अधीक्षक व संयुक्त स्वास्थ्य निदेशक डॉ. वीके नागपाल ने बताया कि पंजाब सरकार ने इस योजना के तहत लगभग 40 लाख परिवारों को नामांकित किया था। केंद्र यूटी को 100 प्रतिशत भुगतान प्रदान करता है। लागत विभाजन केंद्र द्वारा 60 प्रतिशत और राज्य द्वारा 40 प्रतिशत के अनुपात में होता है। राज्यों को केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटाबेस के अलावा इस योजना के तहत जितने चाहें उतने लोगों को जोड़ने की अनुमति है। हालांकि नए लोगों के इलाज का खर्च राज्य को वहन करना होगा। कई अनुरोधों के बावजूद पंजाब सरकार से पैसा नहीं मिला है। पंजाब से इस योजना के तहत मरीजों का इलाज जारी रखना हमारे लिए कठिन हो रहा था। इसलिए योजना के तहत पंजाब के मरीजों की नियमित सर्जरी व इलाज बंद कर दिया गया है।
कोट
जीएमएसएच-16 में इलाज कराने वाले लगभग 70 प्रतिशत मरीज दूसरे राज्यों से हैं। इसमें से 60 फीसदी मरीज पंजाब से आते हैं। बिना भुगतान के इलाज जारी रखना बहुत कठिन है क्योंकि हमें अपने आपूर्तिकर्ताओं को दवाओं, उपकरणों, प्रत्यारोपण इंप्लांट के लिए भुगतान करना पड़ता है इसलिए भुगतान न मिलने से इलाज बंद करना पड़ा है।
-डॉ सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य
कोट
आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार पंजाब सरकार पर आयुष्मान योजना के तहत 16 करोड़ का बकाया है। इसमें 2021 से अब तक के मरीजों के इलाज पर आया खर्च शामिल है। पीजीआई प्रशासन ने पंजाब सरकार को योजना के लाभार्थियों को प्रदान किए गए उपचार के संबंध में लंबित राशि का भुगतान करने के लिए कई बार कहा है। लेकिन उस पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। पीजीआई में प्रतिमाह पंजाब के 1200 से 1400 लाभार्थियों का आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज होता है।
-कुमार गौरव, डीडीए व पीजीआई प्रवक्ता
कोट
आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पंजाब पर चंडीगढ़ के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों का तीन करोड से ज्यादा बकाया है। ऐसे में जब तक पंजाब सरकार बकाया राशि का भुगतान नहीं करती तब तक योजना के अंतर्गत वहां के मरीजों का इलाज करना संभव नहीं होगा।
विज्ञापन

-यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें