शहरी क्षेत्र में दिए जाने हैं एक लाख मकान, अब तक दो लाख लोगों ने किया आवेदन
प्लॉट की कीमत एक लाख रुपये और फ्लैट की कीमत 6 से आठ लाख रुपये रखी गई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को शहरी क्षेत्र में मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना में एक महीने में दो लाख लोगों ने आवेदन किया है। इस योजना के तहत लोगों के लिए मकानों की बुकिंग नवंबर से शुरू होगी। इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को एक लाख मकान या प्लाट दिए जाएंगे। इसके तहत पोर्टल पर गरीब परिवार, जिनकी वार्षिक आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम है और उनके पास घर नहीं हैं, उनसे आवेदन मांगे जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्लॉट एक मरले का है, जिसकी कीमत लगभग एक लाख रुपये रखी गई है। फ्लैट 450 वर्ग फीट का है, जिसकी कीमत शहर के आधार पर 6 से 8 लाख रुपये रखी गई है। उन्होंने कहा कि आवेदक के पैसा जमा कराने के बाद जितना पैसा बचेगा उसके लिए उसे बैंकों से सस्ता ऋण उपलब्ध करवाया जाएगा। किस्त भरने के लिए उसे अधिकतम 20 साल का वक्त दिया जाएगा।
उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि आवेदनों की संख्या आने के बाद नवंबर में नीति को अंतिम रूप देकर उसे पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। उसके बाद उस पर बुकिंग की जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाउसिंग बोर्ड के करीब दस हजार ऐसे फ्लैट हैं, जो बनकर तैयार हो गए हैं, लेकिन किसी को आवंटित नहीं किया गया है। उनकी भी योजना तैयार कर सुविधानुसार लोगों को दिए जाएंगे।
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अब बिल्डर निर्माण से पहले पॉवर हाउस के लिए देगा जमीन व 50 फीसदी पैसा
मुख्यमंत्री ने बताया कि कई शहरों से शिकायत मिली है कि बिल्डर कॉलोनियों व भवन का निर्माण तो कर देते हैं, मगर पॉवर हाउस के लिए जमीन नहीं देते हैं। बाद में उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ता है। कई शिकायतों में यह भी देखा गया है कि बिल्डर बिजली यूनिट का रेट मनमर्जी से वसूलते हैं। इस बारे में सोनीपत, पानीपत व गुरुग्राम से काफी शिकायतें आई थीं। उसके बाद अब निर्णय लिया गया है कि हाउसिंग स्कीम का प्लॉन देते वक्त बिल्डर को पॉवर हाउस की जमीन और 50 फीसदी पैसा देना होगा। बाकी पैसा दो साल के भीतर या ऑक्यूपेंस ओक्युपेंसी सर्टिफिकेट से पहले देना होगा। साथ ही बिजली कनेक्शन अब बिजली विभाग देगा। ब्लक में कनेक्शन नहीं दिए जाएंगे।
आबादी वाले क्षेत्रों से हटेंगी
हाई वोल्टेज लाइनें
अब घरों, फिरनी, पार्कों, तालाबों, स्कूलों आदि के ऊपर से गुजरने वाली 33,000 वोल्ट्स (केवी) और 11,000 वोल्ट्स (केवी) की बिजली लाइनों को शिफ्ट किया जाएगा। इसके लिए 151 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड के 10 सर्कल में 2707 स्थानों पर लाइनों को शिफ्ट करने पर लगभग 96 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी प्रकार दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड के 11 सर्कलों में लाइनों को शिफ्ट करने पर 55 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आने का अनुमान है।
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फिरनी से तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाले डेरे-ढाणियों को मिलेंगे बिजली कनेक्शन
गांव की फिरनी से तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाली डेरों-ढाणियों को बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। पहले सरकार ने फिरनी से एक किलोमीटर तक बने 10 घरों को भी कनेक्शन देने का प्रावधान किया था। उन्होंने कहा कि यदि अभी भी कोई घर बचता है तो वे सोलर कनेक्शन ले सकते हैं। इस पर सरकार 50 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी देगी। उन्होंने कहा कि बेचिराग गांव, जिनकी फिरनी नहीं होती, उन्हें भी कनेक्शन दिए जाएंगे। प्रदेश में ऐसे लगभग 200-300 गांव हैं। इसके अलावा 300 मीटर तक सर्विस कनेक्शन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। 300 मीटर के बाद एचटी, एलटी लाइन की जितनी लंबाई होगी, उसके खर्च का केवल 50 प्रतिशत पैसा उपभोक्ताओं से लिया जाएगा। साथ ही स्वैच्छिक लोड निर्धारण स्कीम के तहत आवेदन करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 अक्तूबर कर दिया गया है। ट्रांसफार्मर चोरी होने पर नया ट्रांसफार्मर लगाने के लिए किसान को अब सिर्फ 25 प्रतिशत राशि देनी होगी। यदि ट्रांसफार्मर छह साल से लगा है तो किसान को केवल 10 प्रतिशत राशि देनी होगी।
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प्रीमियम कटने के बाद भी बीमा नहीं हुआ तो सरकार दिलाएगी विशेष पैकेज
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनियों ने क्लस्टर बनाए थे, परंतु सब जगह बीमा कम्पनियां नहीं पहुंच पाईं और बैंकों ने फसली ऋण पर प्रीमियम काट लिया। इसके समाधान के लिए सरकार बैंकों से बात करेगी और किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से विशेष पैकेज दिलवाया जाएगा। सीएम ने कहा कि गुलाबी सुंडी से कपास की फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल खोल दिया गया है। किसानों को साढ़े 7 हजार से 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाएगा। इसी प्रकार, बाढ़ के कारण जिन किसानों ने धान की दोबारा रोपाई की थी और उसमें खराबा आ गया था, की भरपाई भी सात हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से की जाएगी।
केंद्र से बाजरे की खरीद का कोटा बढ़ाने का अनुरोध
बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2500 रुपये प्रति क्विंटल है। हैफेड 2200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से वाणिज्यिक खरीद कर रहा है। भावांतर भरपाई योजना के तहत सरकार 300 रुपये दे रही है। नैफेड ने भी 2.5 लाख मीट्रिक टन बाजरा खरीदना निर्धारित किया है। सरकार ने इस कोटे को बढ़ाने का अनुरोध किया है। इस बार प्रदेश में 6 लाख मीट्रिक टन बाजरे का उत्पादन होने का अनुमान है।