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राष्ट्रीय हरित अधिकरण के महत्वपूर्ण फैसलों को सरल भाषा में संपादित कर बनाई किताब

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विभाग और पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्ब्यिूनल) के साल 2020 के कई महत्वपूर्ण फैसले को सरल भाषा में बदलकर एक किताब की शक्ल दी है। शनिवार को ऑनलाइन के माध्यम से ‘ग्रीन वर्डिक्ट 2020’ किताब का विमोचन किया। इस मौके पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय मुद्दों की समस्या को सुलझाने के लिए विद्यार्थियों में कौशल का विकास करना होगा। उन्हें समस्या वाली जगहों पर ले जाना होगा। जब वे समस्या को देखेंगे, तभी इसका समाधान खोज पाएंगे और जागरूक भी होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण समस्याओं वाली जगहों का दौरा करने और वहां के हालातों पर शोध करने के साथ प्रदूषण मुक्त जगहों का भी दौरा कर उसके कारणों पर अध्ययन करने के लिए कहा। बता दें जस्टिस आदर्श कुमार गोयल पीयू के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने कानून विभाग से बीए-एलएलबी की डिग्री ली है।
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पर्यावरणीय मुद्दों पर बने कानूनों को जमीनी धरातल पर लागू करने में बेहतर योगदान दे सकते हैं युवा
जस्टिस गोयल ने कहा कि पर्यावरण के दोहन को रोकने के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कानून बने हैं, लेकिन वे धरातल पर लागू नहीं हो पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि लोग और समाज अब भी जागरूक नहीं है। इसमें ग्रीन वर्डिक्ट- 2020 किताब अहम रोल निभाएगी। उन्होंने किताब का संकलन करने वाली प्रो. सुमन मोर व प्रो. रविंद्रा खैवाल के प्रयासों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि युवा पर्यावरणीय मुद्दों पर बने कानूनों को जमीनी धरातल पर लागू करने में बेहतर योगदान दे सकते हैं। इसके साथ ही वे नए विचार और बेहतर तरीकों को बता सकते हैं।
प्रो. सुमन मोर बोलीं- आम आदमी की समझ में आए फैसले, सरल भाषा में लिखकर किया प्रकाशित
वर्डिक्ट- 2020 का संकलन करने वाली व पर्यावरण विभाग की चेयरपर्सन प्रो. सुमन मोर ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के फैसले लोगों तक जाने चाहिए। इन फैसलों में नियम कानून, अधिकार सहित मुआवजे का विस्तार से वर्णन होता है। जब लोगों को इसके बारे में पता होगा, तभी वे आवाज उठा पाएंगे। किताब लिखने के पीछे वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि जब वे किसी एक फैसले को पढ़ रही थी तो उन्हें समझ आया कि फैसला तो बहुत अच्छा है, लेकिन भाषा काफी कठिन है, जो आम आदमी के समझ से बाहर है। इसके बार उन्होंने ग्रीन ट्ब्यिूनल के साल 2020 के 20 से ज्यादा महत्वपूर्ण फैसलों को सरल भाषा में लिखकर प्रकाशित किया।
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पर्यावरण के मुद्दों पर समझ बढ़ाने वाली किताब
किताब को संकलित करने में अहम भूमिका निभाने वाले व पीजीआई के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के पर्यावरण स्वास्थ्य केविशेषज्ञ प्रो. रविंद्रा खैवाल ने बताया कि किताब में ट्ब्यिूनल के फैसले को इंफोग्राफिक्स के साथ समझाया गया है। जिन मुद्दों से संबंधित फैसला है, उसके बारे में विस्तार से समझाया गया है। किताब का मुख्य मकसद यही है कि लोगों को पर्यावरण संबंधी अधिकार के बारे में पता चला, ताकि वे जागरूक हो सकें।
देश की कई यूनिवर्सिटी से 200 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम के दौरान पीयू के अलावा सीडीएलयू, सिरसा, जीएनडीयू, अमृतसर, बीएचयू, बनारस, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू, जम्मू, एमिटी यूनिवर्सिटी दिल्ली, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी आदि के लगभग 200 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान जस्टिस प्रीतम पाल, जस्टिस जसबीर सिंह, आईएएस उर्वशी गुलाटी, आईएएस सुबोध कुमार, पद्मश्री बलबीर सिंह सींचेवाल के साथ पीयू के संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पर्यावरण विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुमन मोर ने किया।
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