जाने माने साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने सोमवार को यूटी गेस्ट हाउस में आईएएस सुमिता मिश्रा के कविता संग्रह ‘जरा सी धूप’ का विमोचन किया। सुमिता चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी की चेयरपर्सन हैं।
वे हरियाणा सरकार में वरिष्ठ अधिकारी हैं और काफी समय से चंडीगढ़ लिटरेरी क्लब के माध्यम से चंडीगढ़ में साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रही हैं।
उनके सहयोग से लेक क्लब पर लिट्रेटी फेस्ट आयोजित किया गया। उनकी पुस्तक का प्रकाशन यूनिस्टार बुक्स चंडीगढ़ ने किया है। इस दौरान प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा भी मौजूद थे।
साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को साहित्य लिखना ही नहीं चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों की कई अड़चने होती हैं।
वे प्रशासनिक सेवाओं में रहे हैं और इन बातो को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक अधिकारी साहित्य या कविताएं लिखें तो उसमें वे उस पीड़ा को रखे जो आसपास के माहौल में देखते हैं।
उन्होंने कहा कि जरा सी धूप में सुमिता मिश्रा ने हिंदी के साथ-साथ उर्दू का भी उपयोग किया है। यह अच्छी बात है। इसमें कई ऐसे शब्द हैं जो मुहावरे जैसे लगते हैं पर हैं नहीं, यह नया प्रयोग है।
अशोक वाजपेयी ने कहा कि उनको अब चंडीगढ़ से लगाव हो गया है। हिंदी को कई लोग अपने ढंग से उपयोग करते हैं। किसी भी सूरत में हिंदी का मूल रूप नहीं बिगड़ना चाहिए।
काव्य संग्रह मे 75 कविताएं
पर्यटन एवं आवभगत विभाग, हरियाणा की सचिव और निदेशक सुमिता मिश्रा ने अपने कविता संग्रह ‘जरा सी धूप’ में 75 कविताओं को संकलित किया है।
सभी कविताएं उनकी सूक्ष्म अनुभूति और बौद्धिक प्रखरता का विलक्षण संयोग प्रस्तुत करतीं हैं। इन कविताओं में भौतिकवाद और उपभोक्तावादी अपसंस्कृति की चपेट में आये मानव-मूल्यों की आह और कराह साफ सुनाई देती है।
मां को समर्पित किया संग्रह
सुमिता मिश्रा के कविता-संग्रह की भाषा और शैली अत्यंत सहज, सरल और सृजनात्मक है। उन्होंने इस पुस्तक को अपनी मां डॉ. प्रेम कुमारी को समर्पित किया है।
पर्यटन एवं सांस्कृतिक कार्य विभागों के प्रधान सचिव विजय वर्धन ने इस पुस्तक के सार का विस्तारपूर्वक विश्लेषण किया है।
इस अवसर पर सुमिता मिश्रा की माता डॉ. प्रेम कुमारी मिश्रा, उनके पति परमजीत एवं परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।