पंजाब यूनिवर्सिटी व एनबीटी ने शनिवार को पुस्तक मेला लगाया। पीयू में आयोजित इस मेले का शुभारंभ वीसी प्रो. राजकुमार ने किया। उन्होंने कहा कि पुस्तकों से प्रेम बहुत जरूरी है। पुस्तकों में ज्ञान का भंडार छुपा होता है। आज के युवाओं को अधिक से अधिक किताबें पढ़ने की आदत डालनी होगी। हरेक किताबें पढ़नी चाहिए, ताकि संपूर्ण ज्ञान प्राप्ति हो सके। उन्होंने कहा कि पीयू लगातार आगे बढ़ रहा है। यहां के विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस दौरान एसपी सिंब ओबेराय, गुरभेज गोराया, डीयूआई पीयू प्रो. शंकरजी झा, एनबीटी डायरेक्टर लेफ्टिनेंट कर्नल युवराज मलिक ने भी विचार रखे और पुस्तक मेले की खूबियां बताईं। इस मेले में 70 से अधिक पब्लिशर्स ने हिस्सा लिया। लाखों की संख्या में किताबें यहां पहुंची हैं जो हिंदी, पंजाबी, उर्दू व अंग्रेजी भाषा में हैं। पहले दिन सैकड़ों विद्यार्थी पुस्तकों को देखने पहुंचे। पुस्तकों पर छूट भी प्रदान की जा रही है। यह मेला 9 फरवरी तक चलेगा।
हिंदी को किया गया इग्नोर, आक्रोश
पीयू व एनबीटी की ओर से पुस्तक मेले के लिए कई बोर्ड प्रचार के लिए बनाए गए हैं। उन बोर्ड पर केवल पंजाबी व अंग्रेजी भाषा में संदेश लिखे गए हैं। तमाम लोगों ने नाराजगी जताई कि हिंदी भाषा देश की भाषा है लेकिन उसमें संदेश नहीं लिखवाया गया। हैरत तो यह है कि पीयू ने भी इसे मेले में भागीदारी की है। मुख्य गेट पर भी हिंदी व पंजाबी में ही संदेश लिखे गए हैं। तमाम हरियाणा के लोगों ने भी इस पर नाराजगी जताई है। सहायक निदेशक प्रदर्शनी शुभाशीष दत्ता ने कहा कि कुछ बोर्ड हिंदी के भी बने हैं, लेकिन अंग्रेजी और पंजाबी पर अधिक ध्यान दिया गया है।