पीजीआई ने जो मांगा, उतना केंद्र सरकार ने नहीं दिया। साल 2020-21 के लिए पीजीआई ने कुल 2150 करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन सरकार की ओर से पीजीआई को सिर्फ 1551.53 करोड़ रुपये मिले हैं, जो करीब 28 फीसदी कम है। हालांकि, पीजीआई का कहना है कि रिवाइज बजट में उन्हें 250-300 करोड़ मिल जाएंगे।
इस बारे में केंद्र सरकार की ओर से उन्हें आश्वासन भी मिला है। इसके अतिरिक्त पीजीआई के जो प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उसके लिए बजट अलग से आवंटित किए गए हैं। पीजीआई डायेरक्टर प्रो. जगतराम का कहना है कि उन्हें आश्वासन मिल चुका है कि रिवाइज में उन्हें समुचित बजट दिया जाएगा। कोई भी प्रोजेक्ट रोके नहीं जाएंगे।
पीजीआई ने अपने के लिए कुल 2150 करोड़ की मांग की थी। इनमें 1300 करोड़ सैलरी के लिए, जबकि 700 करोड़ उपकरण व विकास के लिए मांगे थे। इनमें से सैलरी के लिए 1076 करोड़ मिले, जबकि उपकरणों की खरीद के लिए 325 करोड़ मिले हैं। पिछली बार पीजीआई ने 1900 करोड़ की डिमांड की थी, जबकि मिला था 1760 करोड़ रुपये। हालांकि, पीजीआई खुद भी कमाई करता है।
दाखिले, टेस्ट, और दुकानों के किराए से भी पीजीआई को करोड़ों की इनकम होती है। साल 2019-20 में कुल 155 करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य रखा गया था। 2020-2021 के लिए 160 करोड़ रुपये का लक्ष्य है। ऐसे में पीजीआई के लिए फिलहाल ज्यादा दिक्कत वाली बात नहीं है। इसके अतिरिक्त पीजीआई को रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग संस्थानों से भी ग्रांट मिलती है।