चंडीगढ़। पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने एक पुस्तक व दो लघु फिल्में जारी कीं। इसका नाम चंडीगढ़ का विकास : सेफ स्ट्रीट फूड वेंडिंग जोन है। इसमें बताया गया है कि दुनिया भर में खाद्य जनित रोग एक प्रमुख स्वास्थ्य चिंता है। स्ट्रीट फूड को इस बीमारी के बोझ में फंसा हुआ माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्ट्रीट फूड को गुणवत्तापरक बनाने की योजना है।
जानकारी के अनुसार पूरी दुनिया में करोड़ों लोग प्रतिदिन स्ट्रीट फूड खाते हैं। भारत के स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के बीच खाद्य स्वच्छता की वर्तमान स्थिति निराशाजनक है। स्ट्रीट फूड वेंडिंग भारतीय शहरों में जीवन शक्ति और दिलचस्प वातावरण देने वाले बाजारों का एक अभिन्न हिस्सा है। स्ट्रीट फूड भी अक्सर एक विशेष इलाके की खासियत है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह लोगों को सुविधाजनक स्थानों पर सस्ते स्थानीय खाद्य पदार्थ देता है। यह शहरी अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह लाखों लोगों को स्वरोजगार प्रदान करता है।
स्मार्ट सिटी के रूप में घोषित करने के साथ चंडीगढ़ को सेफ फूड टाउन के रूप में विकसित करने पर विचार किया गया था। उस पर काम होने के बाद अब दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। परियोजना के दूसरे चरण में प्रशिक्षण को शामिल किया गया है। डॉ. सोनू गोयल, डॉ. अमरजीत सिंह आदि ने रिसर्च के जरिये इस पर बेहतर कार्य किया है। डॉ. कुमार पुष्कर की देखरेख में पायलट प्रोजेक्ट डिजाइन किया गया है जो सड़क विक्रेताओं आदि के भोजन की गुणवत्ता पर कार्य करेगा।