पूर्व विधायक अशोक शर्मा की कांग्रेस में दोबारा वापसी ने कार्यकर्ताओं में नई जान फूंक दी है।
2 अप्रैल को पंजाब कांग्रेस प्रभारी शकील अहमद एवं पंजाब कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा पठानकोट में लमीनी स्थित अशोक शर्मा के निवास पहुंचकर उन्हें कांग्रेस ज्वाइन करवाएंगे।
अशोक शर्मा की पार्टी में दोबारा वापसी से पूरी तरह से अलग-थलग पड़ चुकी कांग्रेस दोबारा मजबूत होगी। क्योंकि, अशोक शर्मा का पठानकोट में खासा जनाधार है और उनके पार्टी छोड़ देने के बाद उनके साथ जुड़े समर्थक भी पार्टी गतिविधियों में खासा उत्साह नहीं दिखा पा रहे थे।
गलत टिकट आवंटन से नाराज होकर छोड़ी थी कांग्रेस
पेशे से वकील रह चुके अशोक शर्मा ने वर्ष 2002 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ते हुए भाजपा के दिग्गज नेता मास्टर मोहन लाल को 18 हजार मतों से हराया था।
अपने कार्याकाल में उन्होंने पठानकोट का समग्र विकास करवाया। 2012 में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने हाईकमान के टिकट आवंटन के फैसले को गलत ठहराया और पार्टी छोड़ बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ा।
आजाद चुनाव लड़ते हुए भी अशोक शर्मा ने चौबिस हजार के लगभग मत हासिल किए, जोकि कांग्रेस उम्मीदवार द्वारा प्राप्त किए गये मतों के लगभग था। उस समय यदि अशोक शर्मा को कांग्रेस की टिकट दी जाती तो शायद पठानकोट की सीट कांग्रेस विजेता होती।