बोल्ड और नई कहानी...यानी बीए पास....देश की बोल्ड फिल्मों में शुमार फिल्म ‘बी ए पास’ में काम करना इतना आसान नहीं....हरेक नहीं कर सकता...वह काम कर दिखाया शिल्पा शुक्ला ने।
चंडीगढ़ लिट्रेचर फेस्ट में पहुंची थिएशिल्पा शुक्ला ने कहा कि बोल्ड सीन फिल्माना कोई बड़ी बात नहीं थी.....सबसे ज्यादा कठिन था डायलाग बोलना।
उन्होंने कहा कि एक अभिनेत्री होने के नाते उनको किरदार में डूबना जरूरी होता है और यह सब उनको सिखाया है थिएटर ने।
बीए पास हो या कोई अन्य फिल्म...रोल बोल्ड हो या फिर कैसा भी....कहानी की डिमांड है तो कहानी अपीलिंग है तो उसको करने से कोई परहेज नहीं।
शिल्पा शुक्ला ने कहा कि फिल्म बीए पास के लिए हामी भरने से पहले वह उलझन में थीं। उन्होंने कहा कि फिल्म के बारे में उनके एक दोस्त ने बताया। स्क्रिप्ट भेजी।
जब घर में पिता से बात की तो उन्होंने कहा कि यह एक भूमिका है और वह यह फिल्म कर सकती हैं। मेरे मन में एक कोने में यह फिल्म देखने की इच्छा थी।
शिल्पा शुक्ला ने कहा कि यह उनके पिता की आखिरी सलाह थी। उन्होंने कहा कि मां ने यह फिल्म देखी और उनको फिल्म की कहानी काफी पसंद आई।
शिल्पा ने कहा कि बोल्ड किरदार महत्वपूर्ण नहीं होता। वास्तव में बोल्ड या साफ्ट जैसी कोई बात नहीं होती...फिल्म की डिमांड क्या है वह महत्वपूर्ण है।
अगर मैं फिल्म में काम करने से मना भी करती तो भी कोई करता। शिल्पा ने कहा कि कॉलेज की स्टडी के दौरान स्टेज का शौक लगा। जब तारीफ हुई तो आगे बढ़ जाए।
दिल्ली से स्टेज के रास्ते सिल्वर स्क्रीन तक पहुंचने का सफर बेशक मुश्किलों भरा रहा, लेकिन अपने दम पर कामयाबी पाने का नशा कुछ और ही होता है।
फिर परिवार का भी पूरा सपोर्ट रहा। शिल्पा ने कहा कि उनके पास नई फिल्में हैं। वह कौफिन मेकर नामक फिल्म में काम कर रही हैं।
चंडीगढ़ भी आ चुकी हैं शिल्पा
शिल्पा ने कहा कि उनका बैकग्राउंड थिएटर का है। वर्ष 2004 में वह चंडीगढ़ में प्ले करने आई तो चंडीगढ़ में गिर गई थी। पिछले तीन महीने ट्रैवलिंग कर रही हैं और फोटोग्राफी की।
उन्होंने बताया कि फिलहाल वह एक स्कूल पर डाक्यूमेंट्री बना रही हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके पापा का सपना था जिसको वह पूरा करना चाहती हैं।
शिल्पा ने कहा कि चक दे इंडिया फिल्म जब वह कर रही थीं तो उनको लगा कि वह स्पोर्ट्स बैकग्राउंड की है।