मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में जेपी दत्ता की हाल ही रीलिज फिल्म ‘पलटन’ की स्टार कास्ट भी पहुंची। पलटन के अभिनेता सोनू सूद और गुरमीत चौधरी ने इस दौरान एक संगोष्ठी में भाग लिया। इसमें संबोधित करते हुए सोनू सूद ने कहा कि जवान कभी अपने मन से युद्ध नहीं लड़ता, उसकी दुश्मन देश के जवानों से कभी निजी दुश्मनी नहीं होती। वे तो युद्ध भूमि में इसलिए जाता है, क्योंकि वे उन्हे बहुत प्यार करता है, जिन्हें (घरवालों व देशवासियों) वे पीछे छोड़ जाता है। इसलिए जवान ही इस देश के असली हीरो हैं।
सोनू सूद ने कहा कि पलटन फिल्म करके जवानों और अफसरों की भूमिका को जीने के बाद उन्हें मालूम चला कि वाकई जवान की जिंदगी कितनी कठिन होती है। सोनू ने कहा कि वैसे तो युद्ध किसी चीज का हल नहीं है, लेकिन देश की निगरानी के लिए जवानों को अपना फर्ज निभाना पड़ता है। इसलिए सभी देशों की सरकारों को चाहिए वे आपस में बैठकर अपने मसले निपटाएं, ताकि कभी युद्ध जैसे हालात न बने।
परदे और बॉर्डर के हीरो में बड़ा फर्क
पलटन फिल्म के एक और अभिनेता गुरमीत चौधरी ने कहा कि जेपी दत्ता की फिल्म करने के बाद ये तो मालूम चल गया है कि परदे और बॉर्डर के हीरो में जमीन-आसमान का फर्क होता है। मेरे पिता भी फौज में सूबेदार मेजर थे, वे चाहते थे कि मैं भी अफसर बनूं। सैन्य भर्ती में फिजिकल टेस्ट क्लीयर कर लिया था, लेकिन दिल में था एक्टर बनना है। इसलिए घर से भागकर मुंबई पहुंच गया और अब पलटन फिल्म करने के बाद जब मैंने वर्दी में अपनी फोटो अपने पिता को भेजी, तो उन्हें भी यह खुशी हुई कि चलो बेटे ने फिल्म में ही सही, तन पर देश के गर्व का प्रतीक फौज की वर्दी तो पहनी।
जनता-सेना के बीच बेहतर होने चाहिए संपर्क
मिलिट्री फेस्ट में एक संगोष्ठी में प्रसिद्ध कॉलमनवीस वीर संघवी ने कहा कि लोगों और सशस्त्र बलों के बीच बेहतर संबंध होने चाहिए। इसके साथ-साथ उन्होंने सशस्त्र बलों के साहसिक कारनामों को उजागर करने में सिनेमा और मीडिया की भूमिका पर भी विचार रखे। लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एनएस बराड़, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) टीएस शेरगिल, यूके के ब्रिगेडियर जस्टिन मासीजेवेस्की, एनडीटीवी चैनल की प्रमुख आरती सिंह ने भी इस पर अपने विचार रखे।