जीरकपुर की 23 वर्षीय प्रियंका की जिंदादिली लोगों के लिए मिसाल बन गई है। जब तक जिंदा थीं, दूसरों को अंगदान और रक्तदान के लिए जागरूक किया, जब मौत हुई तो चार लोगों को जाते-जाते जिंदगी दे गईं।
रोड एक्सीडेंट के बाद प्रियंका पीजीआई में दाखिल हुई थी। ब्रेन डेड होने के बाद वीरवार सुबह उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया। परिजनों ने बेटी की आखिरी ख्वाहिश को पूरा करने में जरा देरी नहीं की। परिजनों की सहमति के बाद पीजीआई ने उसकी किडनी और कोर्निया सफलतापूर्वक निकाल लिया। किडनी दो पेशेंट में ट्रांसप्लांट भी कर दी गई, जबकि कोर्निया को संभालकर रख दिया गया है। कोर्निया दो मरीजों में लगाया जा सकता है।
प्रियंका अंग और रक्तदान अभियान से जुड़ी थी। श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रेसिडेंट राकेश संगर ने बताया कि प्रियंका उनकी सबसे मेहनती और कर्मठ वालंटियर थी। एक भी कैंप वह मिस नहीं करती थी। उसका काम लोगों को अंगदान और रक्तदान के लिए प्रेरित करना था। बिना किसी स्वार्थ के वह हर कैंप में आती और अपना पूरा समय देती थी। उसका शुरू से ही सामाजिक कार्यों के प्रति लगाव था।