चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के विभागों में इस समय बोर्ड ऑफ कंट्रोल बनाने की योजना चल रही है। बड़ा सवाल यह है कि इस योजना को आखिरी मंजूरी कौन देगा। जानकारी के अनुसार सिंडिकेट के बिना ही इसे मंजूरी मिलेगी। हालांकि पीयू ने संबंधित अथॉरिटी से इसे मंजूरी दिलाने की बात जरूर की है। जानकारों ने इस प्रक्रिया को भी एक चाल की तरह माना है।
हर विभाग का अपना बोर्ड ऑफ कंट्रोल होता है। इसमें चेयरपर्सन के अलावा दो पांच प्रोफेसर, पांच एसोसिएट प्रोफेसर, दो असिस्टेंट प्रोफेसर होते हैं। परीक्षा से लेकर दाखिले करने आदि के निर्णय इसी बोर्ड के जरिए होते हैं। विभागों के लिए यह बोर्ड महत्वपूर्ण होता है। पाठ्यक्रम में बदलाव हो या फिर किसी विद्यार्थी के भविष्य को लेकर फैसला लेना हो, यही बोर्ड निर्णय लेता है। इस बोर्ड को बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसको मंजूरी सिंडिकेट देती है। बिना सिंडिकेट के यह लागू नहीं होता। जनवरी माह तक इसे अंतिम मंजूरी मिल जाती है।
पीयू प्रशासन ने 24 दिसंबर तक सभी विभागों से बोर्ड के लिए सदस्यों के नाम मांगे हैं। कहा है कि उसके बाद संबंधित अथॉरिटी से इसे मंजूरी दिलाई जा सकेगी। सूत्रों का कहना है कि 24 दिसंबर तक जरूरी नहीं कि हर विभाग यह जानकारी उपलब्ध कराएंगे। यदि जानकारी मिल भी जाती है तो इस तिथि के बाद सार्वजनिक अवकाश अधिक हैं। एक या दो दिन ही होंगे, जिनमें काम होंगे। इन दिनों में सिंडिकेट की बैठक होना आसान नहीं मानी जा रही। सूत्रों का कहना है कि बोर्ड ऑफ कंट्रोल को बिना सिंडिकेट की मंजूरी के ही लागू कर दिया जाएगा।