हरियाणा में आरटीई के तहत मान्यता प्राप्त लगभग पंद्रह सौ स्कूलों को स्कूल शिक्षा बोर्ड भिवानी संबद्धता न देने पर अड़ गया है। बोर्ड का तर्क है कि इन स्कूलों को प्रोविजनल मान्यता मिली हुई है, इसलिए संबद्धता नहीं दी जा सकती। इससे स्कूल संचालकों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। चूंकि, बोर्ड अधिकारी उनकी फाइल जमा करने से इंकार कर रहे हैं।
हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछले 8 सालों में जितने भी स्कूलों को आरटीई के तहत मान्यता दी है सभी के साथ प्रोविजनल शब्द जोड़ा है। अब बोर्ड इसी ‘प्रोविजलन’ शब्द को आधार बनाकर संबद्धता देने से इंकार कर रहा है। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने कहा कि शिक्षा बोर्ड ने आठवीं तक मान्यता प्राप्त स्कूलों को 30 जुलाई तक 8000 रुपये जमा कराकर संबद्धता कराने के निर्देश दिए हैं।
यदि वे 30 जुलाई तक संबद्ध नहीं होते हैं तो 5 हजार रुपये लेट फीस के साथ संबद्धता करानी होगी। अब स्कूल संचालक बोर्ड के चक्कर काट रहे हैं और अधिकारी मान्यता पर सवाल उठाकर संबद्धता देने से मना कर रहे हैं। जोकि विभाग व बोर्ड अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल न होने का ज्वलंत उदाहरण है। यदि बोर्ड के अधिकारियों को ‘प्रोविजनल’ मान्यता से किसी तरह की आपत्ति है तो वह शिक्षा विभाग से पत्राचार कर उसे कंफर्म करते हुए स्कूलों को राहत दे सकते हैं।
बोर्ड की मनमानी के चलते आठवीं तक का कोई भी स्कूल अभी संबद्धता नहीं ले पाया है, इसलिए सरकार 30 जुलाई तक तय डेडलाइन को खत्म कर तारीख आगे बढ़ाए। जल्द ही एसोसिएशन इस मामले को लेकर एसीएस स्कूल शिक्षा व निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग से मिलेंगे और दिक्कत संज्ञान में लाएंगे।
3206 स्कूलों को जल्द जारी करें एक्सटेंशन
कुलभूषण शर्मा ने कहा कि जब कोर्ट ने गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को भी कानून के अनुसार मौका दिया है, तो सरकार को 3206 स्कूलों को भी राहत देते हुए अस्थायी मान्यता की एक्सटेंशन का लेटर जारी करना चाहिए। चूंकि, जब तक सरकार इन स्कूलों को लेटर नहीं देगी, तब तक बोर्ड के साथ संबद्धता नहीं हो सकती। ऐसे में लाखों बच्चों का भविष्य अंधकार में है।