पढ़ाई से लेकर मीठी-मीठी नोकझोंक और खाने से लेकर घूमना फिरना सब साथ-साथ। चारों हमेशा चहकती नजर आती थीं। सेक्टर-36 स्थित एमसीएम डीएवी कॉलेज में बीएससी फाइनल ईयर की चार स्टूडेंट्स की ऐसी थी दोस्ती।
कॉलेज के फर्स्ट ईयर में हास्टल से शुरू हुई ये दोस्ती इस तरह एक दिन खत्म हो जाएगी शायद ही ऐसा किसी ने सोचा होगा। लेकिन, करनाल में हुए हादसे में इनमें से तीन की मौत से कॉलेज की टीचर्स से लेकर सभी स्टूडेंट्स सन्न हैं। चौथी पीजीआई में गंभीर हालत में भर्ती है। उनकी सहेलियों का तो रो-रोकर बुरा हाल है।
सोनाली सिंदवानी को शुक्रवार देर रात करीब डेढ़ बजे घर से कॉल आया कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। ये सुनते ही सोनाली रोने लगी तो पीजी में रहने वाली अन्य स्टूडेंट्स भी जाग गईं। उसी पीजी में रहने वाली उनकी बेस्ट फ्रेंड नेहा बरूर ने उसे संभाला और पास ही में दूसरे पीजी में रहने वाली संजना बिष्ट और रूबी को कॉल किया।
तीनों ने सोनाली के साथ उसी समय उसके घर जाने की तैयारी की। उनके साथ सोनाली के भाई का दोस्त भी था। रात में ही वे लोग बस से सोनाली के सोनीपत स्थित घर के लिए निकल पड़े। करनाल तक वे बस से गए और वहां उनके परिजनों ने उन्हें लेने के लिए कार भेज दी। वहां से सभी सात सोनीपत के लिए निकल पड़े। रास्ते में वे हादसे का शिकार हो गए।
पीजीआई में मौत से जूझ रही एक सहेली
सोनाली, नेहा, संजना और रूबी बीएससी फाइनल ईयर की स्टूडेंट थी। चारों ने कॉलेज के बाद एक साथ एमबीए करने की प्लानिंग की थी। इन दिनों उनके प्रैक्टिकल चल रहे थे। इसके बाद पेपर शुरू होने वाले थे। सोनाली, नेहा और रूबी, संजना अलग-अलग पीजी में रहती थी, लेकिन पढ़ाई चारों एक साथ ही करती थीं।
हमारी तो बेटी की तरह थी
सोनाली और नेहा जिस पीजी में रहते थी उसके मालिक एमपीएस कलसी और उनकी पत्नी जितेंदर इस घटना के बाद से काफी दुखी हैं। उन्होंने बताया कि नेहा उनके पास पहले से रह रही थी, जबकि सोनाली इसी साल उनके पीजी में आई। जितेंदर कलसी ने बताया कि नेहा काफी मिलनसार थी। वह हमेशा सभी की मदद करती रहती थी। जब भी उनकी तबीयत खराब होती थी कि तो वह उनकी काफी हेल्प करती थी।
पिछले साल उनकी बेटी की शादी के वक्त उसने बहुत मदद की थी। उनकी बेटी के ससुराल जाने के बाद वह उनकी बेटी जैसी बन गई थी। बिना पूजा किए वह घर से बाहर नहीं निकलती थी। यहां तक कि आसपास के मंदिर के सभी पुजारी तक उसे जानते थे। जब भी मंदिर जाती उनके लिए प्रसाद जरूर लाती। इस हादसे ने उन्हें अंदर तक झकझोर के रख दिया है।
हमेशा मुस्कुराती रहती थी दीदी
नेहा की रूममेट अमनदीप कौर ने बताया कि नेहा दीदी हमेशा खुश रहती थी। उनकी जिंदादिली के सभी कायल थे। एक दिन भी वह पीजी में न हो तो उनका मन ही नहीं लगता था। वहीं सोनाली दीदी थोड़ा कम बोलती थी, वह थोड़ा रिजर्व नेचर की थी।
आशीष मौदगिल, प्रवक्ता एमसीएम डीएवी सेक्टर-36 ने बताया कि इस घटना से पूरे कॉलेज स्टॉफ और छात्राओं को गहरा धक्का लगा है। अभी मामले की पूरी जानकारी नहीं मिली है।