मेरी तबीयत से तो कभी इमान से, जमाना खौफ खाता है मेरी उड़ान से। सौ निशाने साधकर लौटगा, तीर निकलेगा जब मेरी कमान से। किसी शायर की ये पंक्तियां खन्ना की बलविंदर कौर नूरी पर ठीक बैठती हैं।
एथलीट नूरी का जन्म लुधियाना में मोहिंदर सिंह और प्रकाश कौर के घर हुआ। 18 साल की उम्र में पायलट बनने के सपने संजोए नूरी घर की छत से गिर गई। सिर में गहरी चोट लगी और आंखों की रोशनी चली गई।
नूरी की आंखों के इलाज के लिए उसे कई जगह दिखाया गया। घर के हालात इतने अच्छे नहीं थे कि उसकी आंखों के इलाज का खर्च उठाया जा सके, लेकिन उसने अपनी कमजोरी से खुद ही निपटने का फैसला कर लिया।
नूरी बताती है कि उसने घर से भाग कर लुधियाना के बीआरटीसी सेंटर में दाखिला लिया। यहीं से उसने कंप्यूटर ऑपरेटर का डिप्लोमा करके साबित किया कि जिंदगी में मुकाम अभी और भी बाकी हैं।