दो जयंती समारोहों में खर्च कर दिए पौने चार करोड़ रुपये, फिर भी गीता जन्मस्थली में अंधेरा छाया रहता है, जिस वजह से श्रद्धालु पाठ नहीं कर पाते। केडीबी ने जिस पवित्र ग्रंथ गीता के नाम पर आयोजित दो जयंती समारोहों में पौने चार करोड़ से अधिक रुपये टेंट पर खर्च दिए उसकी जन्मस्थली पर एक इनवर्टर तक नहीं लगा सका है। बिजली नहीं होने से मुंबई के 52 श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में ज्योतिसर में गीता का पाठ नहीं कर सके और निराश होकर लौट गए।
यह विडंबना उस तीर्थ गीता जन्मस्थली ज्योतिसर की है, जिसकी वजह से पूरे विश्व में धर्मक्षेत्र का नाम गूंजता है। करीब 5200 वर्ष पहले इसी जगह पर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। सदियों से गीता जन्मस्थली ज्योतिसर से पूरी दुनिया में कर्म के संदेश का प्रकाश फैल रहा है, लेकिन वही स्थल बिजली गुल होने पर अंधेरे में डूब जाता है। मुंबई से स्वामी पांडुरंग आठवले के 52 शिष्य ज्योतिसर पहुंचे थे। वह ब्रह्म मुहूर्त में गीता के 18 अध्यायों का पाठ करना चाहते थे।
यह पाठ सुबह साढ़े चार से सात बजे तक चलना था, लेकिन इस दौरान बिजली नहीं होने की वजह से तीर्थ अंधेरे में डूबा रहा, जिस कारण गीता का पाठ नहीं हो सका और बगैर जाप किये आठवले के शिष्य लौट गए। बता दें कि पिछले वर्ष गीता जयंती उत्सव पर ढाई करोड़ रुपये पंडाल (टेंट) पर और ढाई करोड़ लाइट एंड साउंड पर खर्च किया गया था। इस बार एक करोड़ 31 लाख रुपये पंडाल पर और लाइट एंड साउंड (मल्टी मीडिया शो) पर एक करोड़ रुपये खर्च होंगे।