हरियाणा में ब्लैक फंगस अनियंत्रित शुगर वाले मरीजों को सबसे अधिक अपना शिकार बना रहा है। इस बीमारी का शिकार हुए लोगों में अधिकतर मधुमेह रोगी हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और रोहतक में इसके सबसे अधिक मामले हैं। केंद्र सरकार से इसके बचाव की दवाई मिलने का स्वास्थ्य विभाग को इंतजार है।
स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. ऊषा गुप्ता ने बताया कि ऑक्सीजन के सहारे चल रहे कोरोना मरीजों को भी ब्लैक फंगस का शिकार होने का अधिक खतरा है। ऑक्सीजन मरीज के शरीर में आद्रता से होकर पहुंचती है। इसलिए भी ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ रहा है। आंख, नाक व गले में काले निशान पड़ने का साफ संकेत है कि फंगस से यह जगह मरना शुरू हो गई है। शुगर वाले और ऑक्सीजन पर चल रहे मरीज बेहद एहतियात बरतें। अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को भी इस बारे में अवगत करा दिया गया है।
ब्लैक फंगस बीमारी का हो रहा अध्ययन
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने कहा कि अभी ब्लैक फंगस के 35-40 केस की ही पुष्टि हुई है। हर जिले से इस बीमारी के शिकार लोगों की वास्तविक रिपोर्ट मांगी है। इसका अध्ययन भी करा रहे हैं कि यह बीमारी अचानक कैसे आई। इसमें यह भी पता लगाएंगे कि ब्लैक फंगस ने आंख, नाक, कान में सबसे अधिक कहां अपना प्रहार किया। जिलों में इस बीमारी के केस अधिक हो सकते हैं, इसलिए 22 जिलों को प्रदेश के चार मेडिकल कॉलेज से जोड़ दिया है। पांच से छह जिलों के ब्लैक फंगस के मरीजों का उपचार एक कॉलेज में होगा।
केंद्र से दवा मिलते ही वितरण होगा - सीएम
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि ब्लैक फंगस की दवाई का केंद्र सरकार आयात कर रही है। उसके बाद जैसे ही दवाई प्रदेश को मिलेगी, जिलों में उसके वितरण की योजना बनाई जाएगी। सीएम ने कहा कि ब्लैक फंगस इन्फेक्शन (म्यूकरमाइकोसिस) के मरीजों के इलाज के लिए प्रदेश भर में 4 सेंटर खोले जाएंगे। इनमें गुरुग्राम का एसजीटी मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा का अग्रसेन मेडिकल कॉलेज, रोहतक का पीजीआई व करनाल का कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज शामिल होगा।