हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले इनेलो को भाजपा ने चारों खाने चित कर दिया है। परिवार व पार्टी में टूट का सामना कर रहा इनेलो, भाजपा का सर्जिकल स्ट्राइक को सहन ही नहीं कर पाया। पार्टी अपने विधायकों और बड़े नेताओं को भगवाधारी बनने से रोक ही नहीं पाई। लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद तो इनेलो विधायकों के भाजपा में जाने की होड़ ही मच गई। एक के बाद एक दस विधायक अब तक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। नेता प्रतिपक्ष का दर्जा तो अभय चौटाला से पहले ही छिन गया था।
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान तीन और विधायकों के भाजपाई होने से विधायक दल के नेता से भी हाथ धोने पड़ गए। इनेलो में रहकर जजपा का समर्थन कर रहे चार विधायकों ने अलग से राजदीप फौगाट को विधायक दल का नेता चुनकर अभय चौटाला को तगड़ा झटका दिया है। अभय बेशक भाजपा में बिना इस्तीफा देकर गए और जजपा का समर्थन कर रहे विधायकों पर दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन स्पीकर ने अब तक फैसला नहीं सुनाया है।
13 अगस्त को स्पीकर अपना फैसला देने वाले हैं। इनेलो को अहीरवाल में में भाजपा ने दो बड़े झटके दिए हैं। पूर्व डिप्टी स्पीकर गोपी चंद गहलोत और पूर्व मंत्री जगदीश चंद यादव को भी भाजपा अपने पाले में ले आई है। ऐसे में भाजपा की विधानसभा चुनाव की राह बेहद कठिन हो गई है। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले इनेलो को भाजपा और भी झटके दे सकती है।
अब तक भाजपा में शामिल हुए इनेलो विधायक
जाकिर हुसैन, केहर सिंह रावत, परमिंद्र ढुल, बलवान सिंह दौलतपुरिया, रणवीर गंगवा, मक्खन लाल सिंगला, रामचंद कंबोज, नसीम अहमद, नगेंद्र भड़ाना, प्रो. रविंद्र बलियाला।
हम राज बनाने वालों में, जाने वालों की चिंता नहीं : अभय
इनेलो के प्रधान महासचिव अभय चौटाला का कहना है कि वह राज बनाने वालों में हैं। इनेलो छोड़कर जाने वालों की उन्हें चिंता नहीं है। उनकी चिंता वे दल करे, जिसमें इनेलो के गद्दार शामिल हुए हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी अपना बेहतर प्रदर्शन करके दिखाएगी।