हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा 'अबकी बार 75 पार' के नारे के साथ चुनावी दंगल में ताल ठोकने जा रही है। पार्टी ने मिशन-75 को पूरा करने के लिए रणनीतिक बिसात भी बिछा दी है। मगर, 1967 से लेकर 2014 तक हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम का आंकलन किया जाए तो आज तक एक बार ही हरियाणा में कोई राजनीतिक दल 75 सीटें जीत पाया है। 1977 में जनता पार्टी ने आपातकाल के गुस्से का फायदा उठाते हुए कांग्रेस को चारों खाने चित कर 75 सीटें जीती थी।
कांग्रेस मात्र तीन सीटों पर सिमट गई थी। वीएचपी ने पांच और निर्दलीय उम्मीदवार पांच सीटों पर विजयी हुए थे। अब 42 साल बाद भाजपा इस आंकड़े को छूने के लिए बेकरार है। 1977 से पहले या बाद में कोई दल 75 के आंकड़े को न तो पार कर पाया, न ही छू पाया। इस बार अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने मिशन-75 रखा है। भाजपा अगर इस बार यह लक्ष्य हासिल करने में सफल हुई तो इतिहास दोहराया जाएगा। इससे ज्यादा सीटें जीती तो नया इतिहास बनेगा।
भाजपा ने लक्ष्य हासिल करने के लिए एजेंडा सेट कर लिया है। मुख्यमंत्री के तौर पर मनोहर लाल ही भाजपा के चेहरा होंगे और जिताऊ उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारा जाएगा। मुद्दे भी तय हैं। लोकसभा चुनाव की तर्ज पर विधानसभा चुनाव में भी राष्ट्रवाद सबसे बड़ा मुद्दा होगा। अनुच्छेद-370 हटाने को और विकास कार्यों को आधार बनाकर भाजपा जनता के बीच जाएगी।