भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री राम लाल ने पंजाब के नेताओं से दो टूक कहा है कि उन्हें आजीवन सहयोग निधि तो हर हाल में देनी होगी। साथ ही सभी प्रमुख नेताओं को इसमें सहयोग करना होगा। कुछ माह पहले प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक ने यह निधि जमा करने के लिए सभी को निर्देश दिए थे। लेकिन न तो जिलों से ज्यादा रिस्पॉन्स मिल रहा था और न ही सूबे के प्रमुख नेता सहयोग कर रहे थे।
राम लाल ने चंडीगढ़ मुख्यालय में सूबा कार्यकारिणी की बैठक के दौरान प्रमुख तौर पर आजीवन सहयोग निधि को लेकर सभी की खिंचाई की। उन्होंने कहा कि पार्टी के सीनियर नेताओं अटल बिहारी वाजपेई और लालकृष्ण आडवाणी ने यह निधि शुरू की थी। उनके समय से ही यह परंपरा चली आ रही है। सभी मौजूदा और पूर्व पदाधिकारी इसमें पूरा सहयोग करें।
सभी प्रमुख नेता कम से कम पचास लोगों से सहयोग लें। राम लाल ने पंजाब के नेताओं से सवाल किया कि संगठन उन्हें पद क्यों देता है। यह निधि भी संगठन चलाने के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब से जो भी निधि इकट्ठी होगी, उसमें से केंद्रीय संगठन कुछ नहीं लेगा। पहले पचास प्रतिशत यहां रहती थी और पचास केंद्र को जाती थी। लेकिन अब सारी राशि यहीं रहेगी, प्रदेश और जिला इकाइयों के बीच बांटी जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व पंजाब के सभी जिलों की रिपोर्ट लेगा कि कहां से कितनी आजीवन सहयोग निधि इकट्ठी हुई है।
बड़े नेताओं की हुई किरकिरी
बैठक के दौरान आजीवन सहयोग निधि को लेकर बड़े नेताओं की किरकिरी हुई। केंद्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने बैठक में मौजूद लोगों से पूछा कि यहां किस-किस ने आजीवन सहयोग निधि दी है। पीछे बैठे हुए नेताओं ने हाथ उठा कर कहा कि उन्होंने जमा कराई है। लेकिन सबसे पहली कतार में पंजाब भाजपा के सीनियर नेता बैठे थे। पहली कतार से एक भी हाथ नहीं खड़ा हुआ, क्योंकि किसी ने भी यह निधि नहीं दी थी।
बैकफुट पर आ गई थी पार्टी
प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक ने बड़े जोर-शोर से आजीवन सहयोग निधि इकट्ठा करने की योजना शुरू की थी। लेकिन राज्य से लेकर जिलों और मंडल तक रिस्पॉन्स फीका रहा था। पदाधिकारियों का कहना था कि दस साल अपनी सरकार रही, तब भाजपाइयों के काम नहीं हुए। अब कारोबारी नोटबंदी और जीएसटी से बहुत गुस्से में हैं, वे कैसे सहयोग करेंगे। जिसके बाद प्रदेश नेतृत्व ने संकेत दे दिया था कि किसी से जबरदस्ती न की जाए, जो अपनी मर्जी से जितना देना चाहे, ले लो।