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आदमपुर उपचुनाव: इस सीट पर 1967 से अब तक भजनलाल परिवार का दबदबा, कोई नहीं भेद सका यह दुर्ग

Sun, 06 Nov 2022 10:36 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

उपचुनाव में भजनलाल परिवार ने पहली बार सरकार के साथ रहते जीत दर्ज की। पिछले तीनों उपचुनाव यह परिवार सत्ता के खिलाफ ही जीता। भव्य बिश्नोई की जीत का अंतर आज तक इस सीट पर हुए तीन उपचुनावों में सबसे कम रहा है।
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हरियाणा के मुख्यमंत्री के साथ कुलदीप बिश्नोई और भव्य बिश्नोई। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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आदमपुर उपचुनाव में कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के सियासी दुर्ग को भेदने में नाकाम रही। तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार जयप्रकाश जेपी भाजपा उम्मीदवार भव्य बिश्नोई को पराजित करने में असफल रहे। हरियाणा की यह विधानसभा सीट भजनलाल परिवार का गढ़ बन चुकी है। 1967 से लेकर अब तक आम चुनावों व उपचुनाव में यही परिवार इस सीट पर जीतता आ रहा है। दल कोई भी रहा हो, जीत हमेशा इनकी ही हुई।

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आदमपुर में भाजपा भजनलाल के नाम के सहारे ही पहली बार कमल खिला पाई। कांग्रेस टिकट पर भजनलाल परिवार सबसे अधिक बार यहां से जीता। बीते 24 साल में यहां यह चौथा उपचुनाव था, जिसमें भी इस परिवार ने ही जीत हासिल की। पहले चुनाव में ही जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचने का सिलसिला भव्य बिश्नोई ने भी कायम रखा है। इससे पहले उनके दादा भजनलाल, दादी जसमा देवी, पिता कुलदीप बिश्नोई व माता रेणुका बिश्नोई पहला ही चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच चुके हैं।

इस चुनाव में जहां भजनलाल परिवार का गढ़ बचा है, वहीं भाजपा के लिए 2024 विधानसभा चुनाव से पहले यह जीत सुखद है। चूंकि, इस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में बरोदा और ऐलनाबाद उपचुनाव सरकार हार चुकी थी। इस बार भी अगर जीत नसीब न होती तो अगले आम चुनाव के लिए अच्छा संदेश नहीं जाता। इस जीत से 2024 की राजनीतिक दिशा तय होगी। भाजपा का जोश इस जीत से बढ़ा है। गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को इस हार के बाद यह समीक्षा जरूर करनी होगी कि वह अपनी परंपरागत सीट को क्यों नहीं बचा पाई। आप और इनेलो के लिए उपचुनाव के नतीजे पैरों तले जमीन खिसकाने वाले हैं। दोनों ही दलों ने इस तरह की करारी हार की कल्पना नहीं की थी। 

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भजनलाल के नाम सबसे बड़ी जीत
उपचुनाव में भजनलाल परिवार ने पहली बार सरकार के साथ रहते जीत दर्ज की। पिछले तीनों उपचुनाव यह परिवार सत्ता के खिलाफ ही जीता। भव्य बिश्नोई की जीत का अंतर आज तक इस सीट पर हुए तीन उपचुनावों में सबसे कम रहा है। जून, 1998 में जब आदमपुर में पहला उपचुनाव हुआ था, तब कांग्रेस पार्टी से राजनीतिक जीवन का पहला चुनाव लड़ते हुए कुलदीप बिश्नोई हविपा-भाजपा गठबंधन के हरि सिंह से 17 हजार 775 वोटों से जीते थे।

मई, 2008 में आदमपुर में हुए दूसरे उपचुनाव में भजन लाल ने हजकां की टिकट पर कांग्रेस के रणजीत सिंह चौटाला को 26188 वोटों से हराया था। 2011 में आदमपुर में हुए तीसरे उपचुनाव में कुलदीप की धर्मपत्नी रेणुका बिश्नोई ने हजकां की टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस के कुलवीर बेनीवाल को 22 हजार 669 वोटों से मात दी थी। चौथे उपचुनाव में भव्य ने जेपी को 15740 मतों से हराया है। इस सीट पर सर्वाधिक वोटों से जीतने का रिकॉर्ड भजन लाल के नाम बरकरार है। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर फरवरी 2005 में इनेलो के राजेश को 71 हजार 81 वोट के बड़े अंतर से हराया था।

नौ बार इस सीट से जीते भजनलाल
भजन लाल इस सीट से वैसे तो कुल 9 चुनाव जीते, लेकिन उन्हें 8 बार विधायक माना जाएगा। क्योंकि मई, 2008 में उन्होंने 11 वीं विधानसभा सभा के दौरान ही उपचुनाव जीता था। जिस विधानसभा में वह पहले भी विधायक निर्वाचित हुए थे, इस प्रकार उनका विधायक के तौर पर एक ही कार्यकाल होगा। कुलदीप इस सीट से चार बार, उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई और माता जसमा देवी एक-एक बार जीती। कुलदीप के पुत्र भव्य की जीत से इस सीट पर भजन लाल परिवार की 16वीं जीत हुई है। 
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