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हरियाणा विस चुनावः 'मिशन 75' फतह करने को रथ पर सवार हुए सीएम मनोहर, विपक्ष खुद में उलझा

Mon, 19 Aug 2019 01:26 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीएम मनोहर लाल
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हरियाणा में भाजपा को दोबारा सत्तासीन करने के लिए सीएम मनोहर लाल ने कमान संभाल ली है, वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस खुद में ही उलझी हुई है। रूस दौरे से लौटकर स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने के बाद सीएम रविवार को चुनावी रथ पर सवार हो गए। लक्ष्य मिशन-75 फतह करना है। इसके लिए सीएम ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा का मजबूत संगठन मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा को सफल बनाने के लिए जीजान जुटा हुआ है। विधायक अपनी टिकट बचाने के लिए हल्कों में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
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पार्टी पहले ही संकेत दे चुकी है कि खराब परफार्मेंस वाले डेढ़ दर्जन से अधिक विधायकों का टिकट कटना तय है। उसके बाद से विधायकों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। सभी भाजपा विधायक पांच चरणों में होने वाली सीएम की रथ यात्रा को लेकर फील्ड में डट गए हैं। मुख्यमंत्री यात्रा के दौरान हर हल्के में किए गए विकास कार्यों का विस्तार से उल्लेख कर रहे हैं, साथ ही विपक्षी दल भी उनके निशाने पर हैं। भ्रष्टाचार को लेकर वह पूर्व सरकारों पर तीखे वार करने से नहीं चूक रहे। भाजपा को प्रदेश में कमजोर विपक्ष के कारण भी वाकओवर मिल रहा है।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, इनेलो और अन्य दलों को बड़ी हार से मिले जख्म अभी ताजा हैं। इनेलो को तो भाजपा ने लोकसभा चुनाव के बाद एक के बाद एक बड़े झटके दिए हैं। उनके दस विधायक भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इनेलो विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी तक शुरू ही नहीं कर पाई है। कांग्रेस भी अंतर्कलह से जूझ रही है। प्रदेश में कांग्रेस छह गुटों में बंटी हुई है। अधिकांश बड़े नेता मुख्यमंत्री बनने का सपना पाले हुए हैं। स्थिति यह है कि कांग्रेस आलाकमान भी कोई निर्णय नहीं कर पा रहा। इससे कांग्रेस चुनाव की तैयारी शुरू ही नहीं कर पाई है।
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टुकड़ों में बंटी पार्टी का कार्यकर्ता भी असमंजस में है कि किस नेता के साथ जाए। अगर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने जल्दी कोई फैसला नहीं लिया तो पार्टी को विधानसभा चुनाव में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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नियुक्ति के बाद चंडीगढ़ का रास्ता तय नहीं कर पाए आजाद

हरियाणा प्रदेश कांग्रेस का प्रभारी बने गुलाम नबी आजाद को लगभग आठ महीने का समय हो चुका है। आजाद ने लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के तमाम नेताओं को चुनावी बस में सवार करने की कोशिश की, दिल्ली में बैठकें भी खूब लीं, लेकिन प्रदेश के बड़े नेताओं के मतभेद दूर नहीं कर पाए। यही नहीं, आजाद अभी चंडीगढ़ भी एक  बार नहीं पहुंचे। संगठन को मजबूत करने और नेताओं को एक प्लेटफार्म पर लाने में उनका हाल भी पूर्व प्रभारियों की तरह का ही रहा है।

भाजपा चुनाव प्रभारी कर चुके मैराथन बैठकें
चुनावी तैयारियों को लेकर विपक्षी दलों से भाजपा कहीं आगे हैं। विधानसभा चुनाव प्रभारी बनने के बाद केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर चंडीगढ़ पहुंचकर पार्टी कोर ग्रुप और तमाम विभागों की बैठकें ले चुके हैं। उन्होंने सभी आला नेताओं के साथ मिल बैठकर विपक्ष को चुनाव में चित करने की रणनीति तैयार कर ली है।
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