इसका नाम प्राइवेट मुनाफा योजना व किसान शोषण योजना होना चाहिए। भाजपा के विधायक व सांसद भी भाजपा से चुनाव के मैदान में उतरने से डर रहे हैं। कुरुक्षेत्र के सांसद तो पहले ही भाजपा की ओर से चुनाव न लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। भिवानी के सांसद लोकसभा का चुनाव न लड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। यही हाल करनाल व गुरुग्राम के सांसदों का है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की सोच जनता को तकलीफों को कम करना नहीं बल्कि धर्म व जाति के आधार पर जनता को बांटकर वोट लेना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में भाजपा की सरकार बनने से पहले कभी कोई जातीय और धार्मिक आधार पर दंगे नहीं हुए थे, लेकिन खट्टर सरकार के 4 साल के शासनकाल में 4 बार प्रदेश को दंगा-फसाद की आग में धकेला गया। 36 लोगों की मौत हुई। इसके लिए सीधे तौर पर भाजपा जिम्मेदार है।
सुरजेवाला ने कहा कि प्रदेश की जनता को कर्जे के बोझ तले दबा दिया गया है। 2013-14 में प्रदेश पर केवल 60 हजार 300 करोड़ रुपये का कर्ज था, लेकिन अब यह बढ़कर 1 लाख, 41 हजार, 792 करोड़ रुपये हो गया है। रैली को सुरजेवाला के अलावा प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुमित्रा चौहान, पूर्व विधायक रमेश गुप्ता, पवन दीवान, अनिल धंतोड़ी, फूल सिंह खेड़ी, राजकुमार वाल्मीकि, किसान कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेंद्र फौगाट, हरियाणा कृषक समाज के अध्यक्ष ईश्वर नैन, वीरेंद्र जागलान, रणधीर राणा, नाहर सिंह संधू, अमन चीमा, सतबीर भाना, सजीव भारद्वाज, रंजीता मेहता, प्रवेश राणा, प्रवीण नैन ने भी संबोधित किया।