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चंडीगढ़ को मिल ही गया नया मेयर, बीजेपी के देवेश मोदगिल के सिर सजा ताज

Tue, 09 Jan 2018 01:00 PM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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देवेश मोदगिल
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आखिरकार चंडीगढ़ को नया मेयर मिल ही गया। आज हुए चुनाव में बीजेपी के देवेश मोदगिल शहर के 22वें मेयर के तौर पर विजयी रहे। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार देवेंद्र सिंह बबला को हराया। भाजपा के गुरप्रीत ढिल्लों सीनियर डिप्टी मेयर बने। बीजेपी के विनोद अग्रवाल नए डिप्टी मेयर बने।
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चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए आज चुनाव हुए। मेयर पद के उम्मीदवार देवेश मोदगिल को 27 में से 22 वोट मिले, वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार देवेंद्र बबला को सिर्फ 5 वोट मिले।

मेयर चुनाव में भाजपा के एक पार्षद ने क्रॉस वोट किया। सीनियर डिप्टी मेयर के चुनाव में दो क्रॉस वोट हुईं। 9 मनोनित पार्षद वोटिंग नहीं कर सके। वहीं इस बार निगम इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि मनोनीत पार्षदों ने वोट नहीं डाले।
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वैसे भी मोदगिल का मेयर बनना पहले से तय माना जा रहा था, 23 वोट भाजपा के समर्थन में थे। इनमें भाजपा के 20 पार्षद, अकाली के एक, सांसद और निर्दलीय का एक-एक वोट शामिल था।
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मेयर को मिलती है यह सुविधा

चंडीगढ़ बीजेपी, संजय टंडन
मेयर को सेक्टर-24 में सरकारी आलीशान घर के अलावा सरकारी गाड़ी मिलती है। मेयर को दो सुरक्षाकर्मी के अलावा कार का सरकारी चालक मिलता है। घर पर काम करने के लिए दो सेवादार भी मिलते हैं। मेयर का अधिकारियों में दबदबा भी रहता है।

नगर निगम में जो भी वित्त एवं अनुबंध कमेटी और सदन में प्रस्ताव पास होने के लिए आता है, वह मेयर के माध्यम से ही आता है। मेयर किसी भी प्रस्ताव को रोक भी सकता है। मेयर को हर साल दो करोड़ रुपये का फंड मिलता है, जो वह पूरे शहर के विकास में खर्च कर सकता है।

सीनियर डिप्टी मेयर को 20 लाख और डिप्टी मेयर को 10 लाख रुपये का फंड मिलता है। इसके अलावा हर माह 25 हजार रुपये का मानदेय मिलता है। सांसद के बाद मेयर का पद ही शहर में अहम है। मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है।

सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के पास कोई अधिकार नहीं होता है। सुविधा के नाम पर सिर्फ उन्हें नगर निगम में कमरा मिलता है, लेकिन उनके पास कोई फाइल नहीं आती है। पार्षद कई बार सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के लिए सरकारी गाड़ी की मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन यह मांग खारिज कर चुका है।
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