भाजपा ने कैबिनेट गठन में इस बार भी जातिगत समीकरण साधने और संतुलन बनाने की कोशिश की है। चुनाव में भाजपा का खुलकर साथ देने वाली जातियों के प्रतिनिधियों को भाजपा ने खुले दिल से मंत्री पद से नवाजा है। खासकर पिछले दस साल के इतिहास में पिछड़ा वर्ग के सबसे अधिक एक तिहाई के करीब पांच ओबीसी चेहरों को मंत्रिमंडल में स्थान दिया है। जाट, ब्राह्मण और अनुसूचित जाति से दो-दो मंत्री जबकि पंजाबी, राजपूत और वैश्य बिरादरी से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं।
मनोहर लाल के स्थान पर मार्च महीने में नायब सैनी को ओबीसी चेहरे के तौर पर सीएम पद की जिम्मेदारी दी गई थी। विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका लाभ भी मिला और ओबीसी वर्ग ने कमल खिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसलिए भाजपा ने कैबिनेट गठन में भी बैकवर्ड वोट बैंक को अपने साथ जोड़े रखने के लिए ओबीसी नेताओं को मौका दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खुद पिछड़े वर्ग से हैं। उनके साथ यादव कोटे से बादशाहपुर से विधायक राव नरबीर सिंह और अटेली से विधायक आरती सिंह राव शामिल हैं।
गुर्जर समाज से तिगांव से विधायक राजेश नागर की लॉटरी लगी है, जबकि बीसी-ए कोटे से बरवाला से विधायक रणबीर सिंह गंगवा को मंत्री पद मिला है। पिछली बार ओबीसी से तीन चेहरे थे। राजपूत समाज को साधने के लिए रादौर से विधायक श्याम सिंह राणा को कैबिनेट मंत्री बनाया है। पिछली बार संजय सिंह राज्यमंत्री थे। वहीं, वैश्य समाज से भाजपा ने फरीदाबाद से विधायक विपुल गोयल पर फिर विश्वास जताया है। वे मनोहरलाल के पहले कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। पिछली बार वैश्य समाज से दो मंत्री थे।
इस बार भी दो दलित शामिल
भाजपा ने दलित वोट बैंक को जोड़े रखने के लिए दो दलित चेहरों को शामिल किया है। इनमें इसराना से विधायक कृष्ण लाल पंवार और नरवाना से विधायक कृष्ण बेदी के नाम शामिल हैं। सैनी के पहले कार्यकाल में भी बनवारी लाल कैबिनेट व बिशम्बर वाल्मीकि राज्य मंत्री थे।
सात ब्राह्मण विधायकों में से दो मंत्री बने : ब्राह्मण वोट बैंक ने भी भाजपा का साथ दिया है, इसलिए पहली बार भाजपा के 7 ब्राह्मण विधायक बने हैं। इनमें से दो चेहरों को कैबिनेट में मौका दिया है। चार बार के सांसद व गोहाना से विधायक डॉ. अरविंद शर्मा और पलवल से पहली बार विधायक बने गौरव गौतम को कैबिनेट में स्थान दिया है।
पंजाबियों और जाटों का प्रतिनिधित्व घटा
इस बार कैबिनेट में पंजाबी और जाट समाज का प्रतिनिधित्व घटा है। पंजाबी कोटे से अकेले अनिल विज की ही एंट्री हो पाई है। मनोहर सरकार के पहले कार्यकाल में मुख्यमंत्री के अलावा अनिल विज कैबिनेट मंत्री थे, वहीं रोहतक से विधायक रहे मनीष कुमार ग्रोवर राज्य मंत्री थे, तो दूसरे कार्यकाल में मनोहर लाल के अलावा अनिल विज शामिल थे।
सैनी के पहले कार्यकाल में पंजाबी कोटे से सुभाष सुधा व सीमा त्रिखा को राज्य मंत्री बनाया गया था। जाट वोट बैंक को साधने के लिए पिछली बार राज्य मंत्री रहे महिपाल ढांडा व पहली बार तोशाम से विधायक बनीं श्रुति चौधरी को भी कैबिनेट मंत्री बनाया है। पिछली बार जाट समाज से रणजीत चौटाला, जेपी दलाल और महिपाल ढांडा तीन मंत्री थे।