हरियाणा में अभूतपूर्व विजय के बाद लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का इतिहास रच भाजपा आत्मविश्वास से लबरेज है। इस आत्मविश्वास की चमक शरद पूर्णिमा के दिन पंचकूला में भव्य समारोह में दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नायब सिंह सैनी ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं के चेहरों पर देखी जा सकती थी। भाजपा ने कड़े परिश्रम से यह मुकाम पाया है, लेकिन अभी सैनी सरकार के सामने इम्तिहान और भी हैं। चुनाव से पूर्व मुख्यमंत्री बदलने से लेकर टिकट वितरण तक में कठोर निर्णय लेने वाली भाजपा मंत्रिमंडल गठन में भी किसी दबाव में नहीं दिखी। पूर्ण बहुमत से बनी मजबूत सरकार को अब जनाकांक्षाओं की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
मंत्रिमंडल गठन में कूटनीतिक संदेश
मंत्रिमंडल गठन में कूटनीति है। जहां तक जातीय व क्षेत्रीय आधार की बात है, तो जिसने जितना दिया, उसने उतने पाया है। भाजपा को सर्वाधिक सीटें जीटी रोड बेल्ट व अहीरवाल-ब्रज क्षेत्र में मिली हैं। जीटी रोड बेल्ट से पांच मंत्री बनाए गए हैं, जबकि अहीरवाल व मेवात-ब्रज से दो-दो। जाट बहुल देसवाली व बागड़ बेल्ट से एक-एक मंत्री है। मुख्यमंत्री समेत पांच मंत्री ओबीसी से हैं, जबकि जाट, ब्राह्मण व अनुसूचित जाति से दो-दो। पंजाबी, राजपूत व वैश्य समुदाय से एक-एक मंत्री बनाया गया है।
भाजपा व सरकार ही नहीं, सैनी भी हुए मजबूत
भाजपा व सरकार के साथ खुद सीएम सैनी भी मजबूत होकर उभरे हैं, क्योंकि चुनाव उन्हें सीएम के रूप में आगे रखकर लड़ा गया। हालांकि पर्दे के पीछे पूर्व सीएम मनोहर लाल की भूमिका भी कम नहीं रही। जनादेश ने साबित किया कि सैनी को सीएम के रूप में स्वीकार किया गया है। कुछ नेताओं में सीएम पद की महत्वाकांक्षाएं थीं, लेकिन अमित शाह ने खुद मोर्चा संभाला और सैनी की पीठ थपथपा कर सभी को संदेश दे दिया कि शीर्ष नेतृत्व की पसंद ही सभी को माननी पड़ेगी। हालांकि अनिल विज जैसे पुराने व मुखर रहने वाले मंत्रियों को साथ लेकर चलने में सैनी की कूटनीतिक परीक्षा होगी।
मृदुभाषी व विनम्र सैनी के लिए सुखद यही है कि बतौर विधायक, सांसद, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और अब मुख्यमंत्री परफार्मेंस के स्तर या सियासी तौर पर उनके खिलाफ कुछ नहीं है। करीब छह माह की पहली पारी में उनका तर्क यह रहा कि उन्हें काम के लिए केवल 56 दिन ही मिले। इसलिए सही मायने में आज से उनके मुख्यमंत्रित्वकाल की नई व सही मायनों में शुरुआत है। अब 56 इंच का सीना करके चुनौतियों का सामना करते हुए हर मोर्चे पर खरा उतरना होगा।