पंजाब में भाजपा ने सिख चेहरों को आगे लाने की रणनीति को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। पहली 34 उम्मीदवारों की सूची में 13 सिख चेहरों को टिकट देकर पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब में उनका मिशन पंथक वोट है। जिसके सहारे वह एसजीपीसी तक पहुंच सकते हैं। लिहाजा, पार्टी कार्यालय में भी जो बोले सो निहाल के जयघोष सुनने को मिलने लगे हैं।
भाजपा ने दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान मनजिंदर सिरसा, दमदमी टकसाल के प्रवक्ता प्रो सरचांद सिंह समेत कई सिख चेहरों को भाजपा में शामिल कर अपने पैर पंथक वोटरों में पसारने शुरू कर दिए हैं। पार्टी की तरफ से लगातार सिख चेहरों को पार्टी में शामिल किया जा रहा था और पार्टी ने 34 में से 13 सिख चेहरों को टिकट दिया है। जिसमें पंथक परिवार टोहड़ा भी शामिल है। भाजपा ने टोहड़ा परिवार के नाती कंवरवीर सिंह टोहड़ा को अमलोह से मैदान में उतारा है।
गुरचरण सिंह टोहड़ा लंबे समय तक एसजीपीसी के प्रधान रहे हैं। उनका परिवार पंथक है। भाजपा ने टोहड़ा परिवार को टिकट देकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं कि उनका अगला पड़ाव एसजीपीसी है। इसके अलावा कपूरथला से रंजीत सिंह खोजेवाल को टिकट दिया गया है। पार्टी ने 33 फीसदी टिकट सिखों को देकर पंजाब में अपना फार्मूला हिंदू-सिख भाईचारे वाला रखा है।
अकाली दल से गठबंधन टूटने के कारण भाजपा को सिख वोटरों की कमी खल रही थी। अकाली दल के नेता बार बार भाजपा पर हमला कर रहे थे। पार्टी के पास सिख चेहरों में सिर्फ मंजीत सिंह राय, इकबाल सिंह लालपुरा, सुखमिंदर सिंह ग्रेवाल के अलावा हरजीत सिंह ग्रेवाल थे पर इनके सहारे 117 सीटों पर विजय पताका फहराना भाजपा के लिए आसान नहीं था।
लिहाजा पार्टी ने सिख चेहरों को शामिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी ने सिख चेहरों को पूरा सम्मान देकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं कि पंजाब में भाजपा अब पंथक पार्टी बनने की राह पर निकल पड़ी है।