हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अध्यापक ट्रांसफर पालिसी को मंजूरी दे दी गई। शिक्षा विभाग की वर्तमान ट्रांसफर पालिसी वर्ष 2010-11 के लिए अनुमोदित की गई थी, जोकि अब तक लागू है।
नई प्रस्तावित ट्रांसफर पालिसी समानता, अध्यापकों के मांग अनुसार वितरण के आधार पर तैयार की गई है ताकि बच्चों के शैक्षणिक हितों को सुरक्षित किया जा सके और निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से अध्यापक नौकरी से संतुष्टि का अनुभव कर सकें
प्रस्तावित अध्यापक ट्रांसफर नीति की मुख्य विशेषताओं में ट्रांसफर पालिसी सभी अध्यापक वर्ग, जिसमें प्रधानाचार्य व मुख्याध्यापक भी शामिल हैं, पर लागू होगी। उक्त ट्रांसफर पालिसी लिपिक वर्गीय संवर्ग, खंड शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी व प्रधानाचार्य डाईट पर लागू नहीं होगी। हर वर्ष ट्रांसफर से पहले पदों का पुनर्स्थापन अथवा पुनर्विभाजन किया जाएगा। रिक्तियां केवल कुछ ही विद्यालय में न हों, इसके लिए सभी रिक्तियों को सभी विद्यालयों में आनुपातिक रूप में विभाजित किया जाएगा।
कर्मचारियों के ट्रांसफर के लिए सभी जिलों के सरकारी विद्यालयों को सात क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा। अध्यापक अपने इच्छित क्षेत्रों/विद्यालयों को वरीयता अनुसार चुन सकेंगे। कर्मचारी को उस द्वारा मांगे गए क्षेत्र/विद्यालय में स्थानांतरित किया जाएगा। उसकी इच्छा का कोई विद्यालय न मिलने पर ही उसे अन्य विद्यालयों में नियुक्ति करने पर विचारा जाएगा। जो अध्यापक राज्य में कहीं भी नियुक्त करने के लिए अपनी इच्छा जाहिर करेंगे और सरकार उन्हें मोरनी या मेवात क्षेत्र जैसे कठिन क्षेत्र में नियुक्त करती है तो वह अपने बेसिक वेतन का 10 प्रतिशत व उस पर अर्जित डीए का पात्र होगा।
पहली बार नियुक्ति पाने वाले अध्यापक चाहे वह नई नियुक्ति हो या पदोन्नति, उनकी इच्छा के क्षेत्र व विद्यालय चुनेंगे। अध्यापक प्रत्येक 10 वर्ष बाद क्षेत्र का विकल्प बदल सकेंगे और चुने गए क्षेत्र के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष विद्यालयों का चयन कर सकेंगे। सामान्य स्थानांतरण केवल राज्य सरकार के निर्धारित समय अनुसार ही होंगे, हालांकि प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण, मिसल पर कारण अंकित करते हुए सरकार की पूर्व अनुमति के बाद, वर्ष में किसी भी समय किए जा सकेंगे। स्थानांतरण केवल खाली पद के विरुद्ध ही किए जाएंगे, जिसकी परिभाषा ट्रांसफर पालिसी में दी गई है। 50 वर्ष से कम आयु के किसी पुरुष अध्यापक को लड़कियों के विद्यालय में नियुक्त नहीं किया जाएगा।